हैदराबाद कोर्ट का बड़ा आदेश, यूरो एक्जिम बैंक के ₹100 करोड़ मानहानि केस में रवि प्रकाश-RTV पर अंतरिम निर्देश लागू

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Hyderabad Court on Euro Exim Bank: यूरो एक्जिम बैंक ने पत्रकार रवि प्रकाश और आरटीवी के खिलाफ ₹100 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर किया है। इस मामले में हैदराबाद सिटी सिविल कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को एक अंतरिम आदेश जारी किया। यह आदेश केस संख्या O.S. No. 413/2024 के तहत दिया गया, जिसमें अदालत ने बैंक की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार किया और भविष्य में इस विषय पर होने वाली रिपोर्टिंग के लिए कुछ शर्तें तय कीं। यह मामला उन टीवी प्रसारणों और रिपोर्ट्स से जुड़ा है, जिनमें यूरो एक्जिम बैंक और उसकी बैंक गारंटी को लेकर…

Hyderabad Court on Euro Exim Bank: यूरो एक्जिम बैंक ने पत्रकार रवि प्रकाश और आरटीवी के खिलाफ ₹100 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर किया है। इस मामले में हैदराबाद सिटी सिविल कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को एक अंतरिम आदेश जारी किया। यह आदेश केस संख्या O.S. No. 413/2024 के तहत दिया गया, जिसमें अदालत ने बैंक की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार किया और भविष्य में इस विषय पर होने वाली रिपोर्टिंग के लिए कुछ शर्तें तय कीं।

यह मामला उन टीवी प्रसारणों और रिपोर्ट्स से जुड़ा है, जिनमें यूरो एक्जिम बैंक और उसकी बैंक गारंटी को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोपों में बैंक की वित्तीय स्थिति, गारंटी की वैधता और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए थे।

Hyderabad Court on Euro Exim Bank: अदालत की प्रारंभिक टिप्पणियां

Hyderabad Court on Euro Exim Bank
Hyderabad Court on Euro Exim Bank (Source: Social Media)

अदालत ने अपने शुरुआती निष्कर्षों में पाया कि आरोप लगाने वाले पक्ष द्वारा अपने दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए गए। खास तौर पर, यह दावा कि बैंक की कुल संपत्ति (नेट वर्थ) केवल ₹8 करोड़ है, उसके समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज़ अदालत में नहीं दिया गया।

यूरो एक्जिम बैंक ने अदालत के सामने अपने ऑडिट किए गए वित्तीय दस्तावेज़ पेश किए। इन दस्तावेज़ों (Ex.P11) के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में बैंक की नेट वर्थ ₹1,900 करोड़ से अधिक बताई गई है। अदालत ने इन दस्तावेज़ों को रिकॉर्ड में लिया।

Hyderabad Crime News: गंभीर आरोपों पर अदालत का रुख

धोखाधड़ीपूर्ण गारंटी, हवाला लेन-देन और आरबीआई/फेमा उल्लंघन जैसे आरोपों पर अदालत ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि इन आरोपों के आधार पर बैंक के खिलाफ कोई आपराधिक मामला शुरू हुआ हो। इस स्तर पर अदालत ने माना कि इन आरोपों को सही ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।

अदालत ने यह माना कि बैंक ने अंतरिम राहत के लिए प्रथम दृष्टया मजबूत मामला बनाया है और उसके पक्ष में संतुलन भी है। साथ ही, लगातार आरोपों के प्रसारण से बैंक की छवि और व्यापार को नुकसान हो सकता है। हालांकि, अदालत ने पूरी तरह से रोक लगाने के बजाय सीमित निर्देश जारी किए।

Hyderabad Court Orders: अदालत के निर्देश

Hyderabad Court Orders
Hyderabad Court Orders (Source: Social Media)

अदालत ने प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे बिना पुख्ता सबूत के बैंक के खिलाफ कोई आरोप प्रकाशित या प्रसारित न करें। साथ ही, रिपोर्टिंग करते समय अपमानजनक या भ्रामक शीर्षकों से बचें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई जानकारी सत्य और सार्वजनिक हित में है, तो उसे प्रकाशित करने पर रोक नहीं है। इसके अलावा, भविष्य में इस विषय पर आने वाली हर रिपोर्ट में यह बताना जरूरी होगा कि मामला अदालत में विचाराधीन है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।