पिथौरागढ : पिछले महीने एक घायल महिला को 40 किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाने वाले भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों ने एक पोर्टर के शव को कंधों पर लादकर 36 किलोमीटर की विषम पहाडी का सफर पैदल तय करते हुए उसे अंतिम संस्कार के लिए उसके गांव तक पहुंचाकर मानवता की एक और मिसाल पेश की है।
गत 28 अगस्त को भूपेंद्र सिंह राणा (30) की भूस्खलन के दौरान पहाड़ी से गिरी एक चट्टान की चपेट में आकर मौत हो गई थी। राणा के शव को खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर के जरिए उसके गांव तक नहीं पहुंचाया जा सकता था।
आईटीबीपी के एक अधिकारी बलजिंदर सिंह ने कहा, ‘‘हमारे जवानों ने विषम पहाड़ी रास्तों के जरिए शव को ले जाने की चुनौती ली और इसके लिए उन्होंने 36 किलोमीटर का रास्ता तय करते हुए उसे उसके गांव मवानी-दवानी तक ले गये।’’ क्षेत्र के ग्रामीणों के अनुसार, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि आईटीबीपी उनकी मदद के लिए आगे आयी है।
कुछ दिन पहले भी 22 अगस्त को आईटीबीपी के जवानो ने मल्ला जोहार गांव की एक घायल महिला को 40 किलोमीटर दूर मुनस्यारी अस्पताल तक पहुंचाने के लिए 15 घंटे तक दुरूह पहाड़ी का रास्ता तय किया था। व्यास घाटी के ग्रामीणों ने बताया कि राशन आपूर्ति बाधित होने पर आईटीबीपी न केवल स्थानीय लोगों को राशन उपलब्ध कराते है बल्कि क्षेत्र में जाने वाले यात्रियों को भी खाना और आश्रय देते हैं।
धारचूला के उपजिलाधिकारी ए के शुक्ला ने पिछले साल की एक घटना को याद करते हुए बताया कि कैलाश – मानसरोवर यात्रा के एक श्रद्धालु की नाभीढांग में मृत्यु हो गयी थी और तब उसके शव को धारचूला तक पहुंचाने में आईटीबीपी ही आगे आई थी।


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