karnataka High Court Order on Blackmail: कर्नाटक हाई कोर्ट ने एक ऐसे युवक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिस पर अपनी प्रेमिका के निजी पलों की तस्वीरें और वीडियो लेकर उसे ब्लैकमेल करने का आरोप है। कोर्ट ने साफ कहा कि कोई भी सच्चा प्रेमी ऐसी हरकत नहीं कर सकता। तस्वीरों के सहारे किसी महिला को जबरन शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करना गंभीर अपराध है। जस्टिस वी. श्रीशानंद ने मामले की सुनवाई करते हुए माना कि आरोपी और पीड़िता के बीच बने संबंध आपसी सहमति से नहीं थे, बल्कि दबाव और डर के माहौल में बनाए गए थे।
Karnataka High Court Order on Blackmail: मार्च 2025 में दर्ज हुई थी शिकायत
पीड़िता ने मार्च 2025 में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई थी। उसने बताया कि वह आरोपी युवक के साथ प्रेम संबंध में थी। इसी दौरान युवक ने चुपके से उनके निजी पलों की फोटो और वीडियो बना लिए। कुछ समय बाद आरोपी ने इन तस्वीरों को सार्वजनिक करने की धमकी देना शुरू कर दिया। इसी डर के कारण युवती को कई बार उसके साथ जबरन संबंध बनाने पड़े। लगातार ब्लैकमेल से परेशान होकर आखिरकार पीड़िता ने अपने परिवार को पूरी बात बताई। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।

Karnataka High Court Order: केस दर्ज होते ही फरार हुआ आरोपी
जैसे ही एफआईआर दर्ज हुई, आरोपी युवक फरार हो गया। उसने पहले ट्रायल कोर्ट में जमानत लेने की कोशिश की, लेकिन वहां से उसे राहत नहीं मिली। इस बीच पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर चार्जशीट भी दाखिल कर दी। इसके बाद आरोपी ने कर्नाटक हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लगाई।

Karnataka High Court News: कोर्ट ने आरोपी को कानून से भागने वाला बताया
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने पूरे मामले को गंभीरता से देखा। कोर्ट ने कहा कि आरोपी प्रेम का दिखावा कर लड़की को शारीरिक संबंध बनाने के लिए बहलाता रहा और बाद में फोटो-वीडियो के जरिए उसे मजबूर करता रहा। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि आरोपी का फरार होना यह दिखाता है कि वह कानून का सम्मान करने वाला व्यक्ति नहीं है।
सहमति की दलील को किया खारिज
आरोपी की तरफ से दलील दी गई कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से थे। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब किसी महिला को डराकर और धमकाकर संबंध बनाने को मजबूर किया जाए, तो उसे सहमति नहीं कहा जा सकता। प्रथम दृष्टया सबूतों को देखते हुए अदालत ने माना कि आरोपी को इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं है।

न्यायालय का सख्त संदेश
हाई कोर्ट ने अपने फैसले के जरिए साफ संदेश दिया कि निजी तस्वीरों का इस्तेमाल कर किसी महिला को शोषण का शिकार बनाना बेहद गंभीर अपराध है। प्रेम के नाम पर की गई ऐसी हरकतें माफ नहीं की जा सकतीं। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पूरी तरह खारिज कर दी।


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