Karnataka Student Sucide Case: कर्नाटक के धारवाड़ में बीएससी के छात्र की हत्या का मामला तूल पकड़ते जा रहा है। दरअसल आदित्य मागेरी की आत्महत्या ने न केवल प्रशासन बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। मामले में पहले तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था, और अब विद्यागिरि पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर रफीक को भी सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई हुबली-धारवाड़ शहर के पुलिस आयुक्त एन. शशिकुमार के निर्देश पर की गई है। जानकारी के मुताबिक, आदित्य मागेरी को पुलिस ने गांजा रखने और उसका सेवन करने के शक में हिरासत में लिया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि बाद में जांच में यह बात सामने आई कि उसने न तो गांजा रखा था और न ही उसका सेवन किया था। इसके बावजूद, परिवार का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उससे 2 हजार रुपये की मांग की थी। बताया जा रहा है कि आदित्य ने अपनी मां से पैसे की बात की थी, लेकिन परिवार ने पैसे देने से मना कर दिया। इसके बाद वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गया था। परिजनों का कहना है कि पुलिस के इस व्यवहार ने उस पर गहरा असर डाला।
Karnataka Student Sucide Case: फांसी लगाकर दी जान
इसी मानसिक दबाव के चलते आदित्य ने सोमवार रात अपने किराए के घर में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद परिवार ने सीधे तौर पर पुलिस को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि अगर पुलिस ने उस पर दबाव नहीं बनाया होता, तो शायद यह दुखद घटना नहीं होती। मामले के सामने आते ही धारवाड़ में गुस्से का माहौल बन गया।
छात्र संगठन एबीवीपी के सैकड़ों कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
पहले तीन कांस्टेबल, अब इंस्पेक्टर भी सस्पेंड
इस मामले में पहले हेड कांस्टेबल चंद्रू धरीमणि, किरण डोक्कन्नवर और सैयद को निलंबित किया गया था। लेकिन जैसे-जैसे मामला बढ़ता गया, विपक्षी दल भाजपा और जेडीएस ने सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने निष्पक्ष जांच और वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की। स्थिति को देखते हुए अब इंस्पेक्टर रफीक को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
पुलिस आयुक्त एन. शशिकुमार ने कहा है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब केवल एक आत्महत्या तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है। परिजन, छात्र संगठन और विपक्ष लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि सच सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।
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