तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव और उद्योग मंत्री पार्थ चटर्जी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने स्कूलों में नौकरियों से जुड़े कथित घोटाले के सिलसिले में शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने टीएमसी पर निशाना साधा और कहा कि मामले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुप्पी उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की स्वीकृति है।
अमित मालवीय ने ममता की चुप्पी पर उठाया सवाल
पार्थ साल 2014 से 2021 तक राज्य के शिक्षा मंत्री थे। उनपर आरोप है कि ग्रुप सी, डी स्टाफ की भर्ती, 11वीं-12वीं कक्षाओं के असिस्टेंट टीचर्स और प्राइमरी टीचर्स की भर्ती में घोटाला किया गया है। इस मुद्दे पर बीजेपी ममता सरकार को घेरने की पूरी कोशिश कर रही है। पश्चिम बंगाल भाजपा के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने ट्वीट किया, ममता बनर्जी की चुप्पी उनके करीबी अपराध की स्वीकृति की ओर इशारा करती है। हो सकता है कि ममता, पार्थ से दूरी बनाने की कोशिश कर रही हो, लेकिन उनका जुड़ाव जगजाहिर है।
सुनयोजित तरीके से जांच एजेंसियों के अधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही हैं
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए, केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शनिवार को कहा, एक सुनियोजित साजिश के तहत, ममता बनर्जी केंद्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और उसके वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाने और झूठ फैलाने की कोशिश कर रही हैं, ताकि उनके राजनीतिक और वित्तीय अपराध सार्वजनिक न हों। यह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार के बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और घोटाले के मामलों को दबाने की चाल है।
अब दुनिया जानती हैं ममता बनर्जी के मंत्री किस तरह से काम करते हैं
चंद्रशेखर ने तंज करते हुए कहा, विडंबना यह है कि कुछ दिन पहले तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने मंत्री पार्थ चटर्जी और उनके सहयोगियों की अच्छे कामों को लेकर प्रशंसा करती थीं, अब पूरी दुनिया जानती है कि वे काम किस तरह के थे। यह अच्छे कामों का नतीजा है किअवैध धन और करोड़ों की संपत्ति जमा हो रही है।
ममता ने खुले तौर पर अर्पिता व पार्थ चटर्जी प्रशंसा की थी
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा, कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री बनर्जी ने मंत्री चटर्जी और उनकी करीबी महिला सहयोगी की खुले तौर पर प्रशंसा की थी। यह भी सच है कि बनर्जी की सरकार के तहत, भर्ती प्रक्रिया कभी भी निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं रही है, और हर सरकारी भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद रहा है। ममता बनर्जी का दावा है कि वह सब कुछ जानती हैं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि उनके मंत्री क्या कर रहे हैं।