महाराष्ट्र में अपने समुदाय के लिए आरक्षण आंदोलन की अगुवाई करने वाले एक प्रमुख मराठा संगठन ने कहा है कि समुदाय की मांगों की उपेक्षा किए जाने की वजह से आगामी लोकसभा चुनाव में वह किसी भी बड़ी राजनीतिक पार्टी को समर्थन नहीं देगा। मराठा क्रांति मोर्चा (एमकेएम) के संयोजक संजीव भोर-पाटिल ने शनिवार को कहा कि संगठन आगामी चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों और छोटी पार्टियों को समर्थन देगा।
उन्होंने कहा, ”हम अपनी मांगों की उपेक्षा करने वाले भाजपा-शिवसेना या कांग्रेस-राकांपा जैसे गठबंधनों की बजाय निर्दलीय प्रत्याशियों या छोटी पार्टियों को समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं।” भोर-पाटिल ने दावा किया कि समुदाय के कुछ सदस्यों को अत्याचार के झूठे मामलों में फंसाया गया है।
उन्होंने कहा, ”हमारी प्रमुख मांगों में अत्याचार के झूठे मामलों का समाधान भी शामिल है। बहरहाल, किसी भी राजनीतिक पार्टी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है। हमारी दूसरी मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य पर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की है।”
भोर-पाटिल ने कहा कि एमकेएम के नेता आम चुनाव के लिए रणनीति पर चर्चा करने की खातिर जल्द मिलेंगे। एमकेएम ने पहले नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण आंदोलन की अगुवाई की थी।
महाराष्ट्र विधानमंडल ने पिछले साल नवंबर में विधेयक पारित कर शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में मराठाओं के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव रखा था। सरकार ने समुदाय को आर्थिक और शैक्षिक तौर पर पिछड़ा वर्ग घोषित किया था।


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