कोरोना से हुई मृत्यु के प्रमाण पत्र के लिए भटक रहे हैं लोग, मुआवजा देने में आनाकानी

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मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार कोरोना से हुई मौतों के मामले में पीड़ितों को 1 लाख की मुआवजा राशि देने की घोषणा कर चुकी है लेकिन यह घोषणा सिर्फ कागजी साबित हो रही है।

भोपाल (मनीष शर्मा) मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार कोरोना से हुई मौतों के मामले में पीड़ितों को 1 लाख की मुआवजा राशि देने की घोषणा कर चुकी है लेकिन यह घोषणा सिर्फ कागजी साबित हो रही है। मृतकों के परिजन अस्पतालों में कोरोना से हुई मृत्यु का प्रमाण मांग रहे हैं और अस्पताल देने से इंकार कर रहे हैं।
कोरोना का दंश झेल रहे परिवारों के सामने अब मौत का कारण जानना भी मुश्किल हो रहा है। अस्पतालों के चक्कर काटने के साथ ही इन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रोजाना कई लोग भोपाल के हमीदिया अस्पताल, जय प्रकाश चिकित्सालय, इंदौर के एमवायएच से लेकर कोविड अस्पतालों के बीच के चक्कर काटने पर मजबूर हो रहे हैं।
मध्यप्रदेश का जबलपुर हो या इंदौर या भोपाल सब जगह मृतक के परिजन कोरोना से मृत्यु का प्रमाण मांगने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध चार सरकारी कोविड अस्पतालों में पिछले दो माह में हजारों की संख्या में कोविड मरीजों को इलाज के लिए भर्ती किया गया। इसमें कई लोगों की कोरोना संक्रमण के चलते मौत भी हुई है। 
जबलपुर, ग्वालियर, सागर सहित राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज एवं जिला चिकित्सालय में मृत्यु कोरोना वायरस से हुई है लेकिन मृत्यु का कारण निमोनिया बताकर झूठ बोला जा रहा है। सभी जगह हालात यह है कि जब इन मृतकों के मृत्यु-प्रमाण पत्र बनकर तैयार हुए, तो उन पर कोरोना संक्रमण से मौत का कोई जिक्र ही नहीं था। शासन द्वारा कोरोना संक्रमित मृतकों के परिवार को जिन योजनाओं का लाभ मिलना है, वह इस वजह से नहीं मिल पाएगा। ऐसे में जब परिजन इन प्रमाण-पत्रों पर कोरोना संक्रमण का उल्लेख करवाना चाह रहे हैं, तो उन्हें अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
संक्रमित की मौत का असल कारण जानने के लिए परिजनों को अस्पताल जाकर पुरा रिकॉर्ड खंगालना पड़ रहा है। कोविड अस्पतालों में फिलहाल रिकॉर्ड सहेजने समेत सभी कागजात अस्त-व्यस्त है, जिस वजह से जिस व्यक्ति की दो माह पूर्व मौत हो चुकी है, उसकी मौत का कारण जानना मुश्किल हो गया है।
बार-बार कटवा रहे चक्कर
ऐसे में परिजनों को बार-बार अस्पतालों के चक्कर काटना पड़ रहे हैं। कई लोगों को एक-दो दिन बाद आने का कहकर उल्टे पांव लौटाया जा रहा है। वहीं, दो दिन बाद पहुंचने पर भी मरीज के इलाज संबंधित दस्तावेजों की सही जानकारी या अधूरी जानकारी ही मिल रही है। अस्पताल एवं संबंधित अधिकारी यह कह कर मृतकों के परिजनों को वापस कर देते हैं कि रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
रतलाम में एक मृतक के परिजन कौशल्या तिवारी का कहना है कि मेरी मां राजकुमारी लौंडिया की कोरोना से मृत्यु हुई है लेकिन अस्पताल लिख कर देने को तैयार नहीं है। ऐसे ही एक मृतक के परिजन अयाजउद्दीन शेख का कहना है कि उनके जीजा जी की मृत्यु कोरोना वायरस से हुई भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल की रिपोर्ट में लिखा है लेकिन फिर भी नगर निगम मानने को तैयार नहीं है कि कोरोना से मृत्यु हुई है। मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए वह 8 दिन से चक्कर लगा रहे हैं, शेख का कहना है कि उन्हें मामा शिवराज पर बहुत भरोसा था लेकिन उनका भरोसा अब उठ गया है। 
वह बताते हैं कि नगर निगम के अधिकारी कह रहे हैं मंत्रालय से निर्देश है कि मृत्यु प्रमाण पत्र पर कोरोना अंकित नहीं किया जाए। धार में एक मृतक राजीव विश्वकर्मा का कहना है कि सरकार ने 1 लाख  की घोषणा मृतकों को देने की वाह वाही लूटने के लिए की है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक ईमानदार और कर्तव्य शील राजनीतिज्ञ है इस मामले को उन्हें तत्काल संज्ञान में लेकर मृतकों के परिजनों की पीड़ा समझना चाहिए।

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