Shimla News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने अपने दिल्ली दौरे के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके कार्यालय में शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने संसदीय परंपराओं, विधायी कार्यों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
Shimla News: संसदीय व्यवस्था और विधायी कार्यों पर चर्चा
मुलाकात के दौरान संसदीय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने, विधायी कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने और विधायकों की भूमिका को सशक्त करने पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सदनों का सुचारू संचालन और सार्थक चर्चा अत्यंत आवश्यक है। इसके साथ ही भविष्य में आयोजित होने वाले अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलनों और जोन स्तर के राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलनों के महत्व पर भी विचार किया गया।
Kuldeep Pathania met Om Birla: हिमाचल विधानसभा की उपलब्धियों की जानकारी
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने लोकसभा अध्यक्ष को अवगत कराया कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने तपोवन, धर्मशाला में कुल 8 बैठकें आयोजित कर एक कैलेंडर वर्ष में निर्धारित 35 बैठकों का लक्ष्य पूरा किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष के दौरान बजट सत्र में 15 बैठकें, मानसून सत्र में 12 बैठकें और शीतकालीन सत्र में 8 बैठकें आयोजित की गईं। पठानिया ने कहा कि इन तीनों सत्रों को मिलाकर सदन की कार्य उत्पादकता लगभग 98 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सदन के सदस्य, चाहे वे सत्तापक्ष में हों या विपक्ष में, संसदीय व्यवस्था के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

Shimla News Today: युवाओं की भागीदारी और लोकतंत्र की मजबूती
तपोवन, धर्मशाला में आयोजित शीतकालीन सत्र के बारे में जानकारी देते हुए कुलदीप पठानिया ने बताया कि आठ दिनों की बैठकों के दौरान 1699 स्कूली छात्र-छात्राओं ने दर्शक दीर्घा से विधानसभा की कार्यवाही को देखा। उन्होंने कहा कि युवाओं की इस भागीदारी से लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होती हैं। जब छात्र संसद की कार्यप्रणाली को नजदीक से देखते हैं, तो उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति रुचि और समझ विकसित होती है। यह आने वाली पीढ़ी के लिए सकारात्मक संकेत है।
आगामी सम्मेलन और अन्य विषयों पर संवाद
इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 18 से 25 जनवरी 2026 तक प्रस्तावित अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन को लेकर भी चर्चा हुई। सम्मेलन में रखे जाने वाले संभावित विषयों, संसदीय सुधारों और समकालीन चुनौतियों पर भी विचार साझा किए गए। इसके अलावा देश और प्रदेश से जुड़े सामाजिक व प्रशासनिक मुद्दों पर भी संवाद हुआ। दोनों नेताओं ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने के लिए आपसी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
रिपोर्ट: विक्रांत सूद
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