गुजरात के राजकोट में कोविड अस्पताल में लगी आग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए गुजरात सरकार से रिपोर्ट मांगी है। कोविड-19 उपचार के लिए निर्धारित इस अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से पांच मरीजों की मौत हो गई है। इससे पहले अगस्त माह में अहमदाबाद के चार मंजिला निजी अस्पताल की सबसे ऊपर की मंजिल पर आग लगने से कोविड-19 से पीड़ित आठ मरीजों की मौत हो गई थी।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को आश्वस्त किया कि केंद्रीय गृह सचिव शनिवार तक बैठक आयोजित करेंगे और देश भर के सरकारी अस्पतालों के लिए अग्नि सुरक्षा निर्देश जारी करेंगे। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर एस रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने देश भर में संक्रमण के बढ़ते मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यों को हालात का मुकाबला करना होगा और कोविड-19 महामारी के हालात से निपटने के लिए राजनीति से ऊपर उठना होगा।
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पीठ ने कहा कि अब वक्त आ गया है जब देश में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए नीतियां, दिशा निर्देश और मानक संचालन प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। मेहता ने पीठ से कहा कि कोविड-19 की मौजूदा लहर पहले से अधिक कठोर प्रतीत हो रही है और वर्तमान में कोरोना वायरस संक्रमण के 77 प्रतिशत मामले 10 राज्यों से हैं। इस पर पीठ ने कहा कि हालात के निपटने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए एक दिसंबर की तारीख मुकर्रर की।
गौरतलब है कि अस्पताल के 26 मरीजों को बचा लिया गया और उन्हें दूसरे अस्पतालों में भर्ती किया गया है। आनंद बंगलो चौक इलाके में चार मंजिला उदय शिवानंद अस्पताल की पहली मंजिल पर आईसीयू वार्ड में देर रात करीब साढ़े 12 बजे आग लग गई। वहां पर कोरोना वायरस से संक्रमित 31 मरीजों का उपचार चल रहा था।


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