पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य की सत्तारूढ़ टीएमसी ने बीजेपी के खिलाफ अपनी लड़ाई तेज कर दी है। इसी चरण में टीएमसी ने वाम मोर्चे और कांग्रेस से बीजेपी की ‘‘सांप्रदायिक एवं विभाजनकारी’’ राजनीति के खिलाफ लड़ाई में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ देने की अपील की है।
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने कहा, ‘‘अगर वाम मोर्चा और कांग्रेस वास्तव में बीजेपी के खिलाफ हैं तो उन्हें भगवा दल की सांप्रदायिक एवं विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ लड़ाई में ममता बनर्जी का साथ देना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ही ‘‘बीजेपी के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष राजनीति का असली चेहरा’’ हैं।’’
रॉय ने दावा कि केंद्र में बीजेपी नीत सरकार द्वारा शुरू की गई एक भी योजना सफल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस विकास के हितों में रचनात्मक आलोचना में विश्वास रखती है। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक रूप ले चुके पशु-तस्करी के मामले पर उन्होंने कहा कि इसे रोकने की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की है, न कि राज्य पुलिस की।
तृणमूल के सांसद ने कहा, ‘‘ बीएसएफ, देश की सीमाओं की रक्षा करती है और वह केंद्र सरकार के अधीन आती है। सीमा पार पुश-तस्करी को रोकना पुलिस की नहीं उनकी जिम्मेदारी है।’’ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अलग-अलग जगह भोजन करने के बजाय उन्हें सीमा पर जाकर देखना चाहिए था कि बीएसएफ अपना काम अच्छे से कर रही है या नहीं।’’
शाह पिछले महीने राज्य के दौरे पर आए थे। यह पूछे जाने पर कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी की राज्य इकाई के प्रमुख दिलीप घोष क्या भगवा पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे इसपर उन्होंने कहा कि यह बीजेपी का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा, ‘‘डायमंड हार्बर के सांसद एवं तृणमूल की युवा शाखा के प्रमुख अभिषेक बनर्जी को घोष की तुलना में अधिक राजनीतिक अनुभव है, जो 2015 से ही राजनीति में सक्रिय हुए हैं, लेकिन उन्होंने कभी तृणमूल का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनने का दावा पेश नहीं किया।’’


Download Android App
Download iOS App



