विकास की दौड़ में पिछड़ कौशाम्बी संसदीय क्षेत्र में देश की सबसे बड़ पंचायत ‘संसद’ में पहुंचने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी और सपा एवं बसपा गठबंधन के बीच त्रिकोणात्मक टक्कर है। सत्रहवीं लोकसभा चुनाव के लिए कौशांबी क्षेत्र से भाजपा से विनोद सोनकर, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी से शैलेंद्र कुमार और गठबंधन से सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज एवं कांग्रेस से गिरीश पासी समेत कुल 12 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।
छठवें चरण लिए छह मई को होने वाले के मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव प्रचार जोर पकड़ता जा रहा है। विभिन्न दलों के प्रत्याशी एवं कार्यकर्ता मतदाताओं से संपर्क कर उन्हें अपने पक्ष में मतदान करने के लिए रात दिन एक कर रहे हैं। इस बार कौशांबी में स्थानीय मुद्दे एवं राष्ट्रीयता पर जातीयता फिर भारी पड़ रही है।
कौशांबी बुद्ध और जैन धर्मावलंबियों के साथ सनातन आस्था से जुड़ स्थलों के लिए प्रसिद्ध कौशांबी अनुसुचित बहुल क्षेत्र है। जीत-हार में अनुसूचित वर्ग के मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरी रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैय्या) की पार्टी जनसत्ता लोकतंत्रिक पार्टी को भी यहां से जीत की आस लिए बैठे हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की लहर में कौशांबी सीट से विनोद सोनकर चुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे थे।
अब दोबारा चुनाव मैदान में हैं, लेकिन इस बार उनकी राह आसान नहीं हैं। गठबंधन उम्मीदवार इंद्रजीत सरोज और जनसत्ता दल के प्रत्याशी शैलेंद्र कुमार से उनका तगड़ मुकाबला है। यहां पर 18 लाख मतदाता विभिन्न राजनीतिक दलों में जातीयता के आधार पर बंटा हुआ दिख रहा है। गठबंधन के प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज के साथ मुस्लिम यादव के अलावा पासी एवं चमार समाज के मतदाताओं का ध्रुवीकरण जीत के लिए आशान्वित कर रहा है। वहीं जनसत्ता दल के शैलेंद्र कुमार पासी समाज के है।
कुंडा प्रतापगढ़ के बाहुबली विधायक जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष (राजा भैया) तारणहार की भूमिका में है। कौशांबी संसदीय क्षेत्र का हिस्सा बनी उन्नाव अप बाबागंज विधानसभा जो प्रतापगढ़ जिले में आता हैं रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का दोनों विधानसभा क्षेत्र में खासा असर है। राजा भैया अपनी नई पार्टी जनसत्ता दल से पहली बार शैलेंद्र कुमार को चुनाव मैदान में उतारा है। राजा के पक्ष में कौशांबी जिले के ठाकुर मतदाता लामबंद हो चुके हैं।
कौशांबी राजा लगातार कौशांबी का दौरा कर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहते हैं। लेकिन इनके पक्ष में कौशांबी में जातीय गणित बनती नहीं दिख रही है। हालांकि कुछ ब्राह्मण एवं गद्दी मुस्लिम मतदाताओं में सेंधमारी के चक्कर में जनसत्ता दल कयास में है। सीधे तौर पर जनसत्ता दल के प्रत्याशी की मजबूती से भाजपा का नुकसान होना तय है।
भाजपा उम्मीदवार विनोद सोनकर पांच वर्ष सांसद रह चुके हैं। पिछले चुनाव में उन्हें मोदी लहर का लाभ मिला था इस बार उन्हें हिंदुत्व कार्ड विकास राष्ट्रीयता के साथ-साथ जाति समीकरण का फायदा मिल सकता है। विनोद सोनकर खटीक समाज का है। उनके पक्ष में खटीक समाज के लोग लामबंद हो चुके हैं। हिंदुत्व कार्ड एवं जाति समीकरण का जहां तक सवाल है कि यादव पासी एवं चमार समाज के लोगों के अलावा शेष जातियां ब्राम्हण, मुराई, कुर्मी, लोध, बढ़ई, लोहार, हलवाई, पुजवा, सोनार और बनिया समाज के मतदाता का समर्थन का लाभ भाजपा की राह आसान कर सकता है।
बरहाल कौशांबी में भाजपा का सीधा मुकाबला गठबंधन के प्रत्याशी से होना तय माना जा रहा है। गठबंधन प्रत्याशी के पक्ष में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव कौशांबी में जनसभा कर चुके हैं। जबकि भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक मई को चुनावी सभा संबोधित कर चुके हैं। जनसत्ता दल के प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पार्टी के अध्यक्ष राजा भैया लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं।


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