पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों में टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ की भर्ती में करोड़ों रुपये के घोटाले में अप्रत्याशित मोड़ आया है। सीबीआई के एसआईटी के एक प्रमुख सदस्य ने समय से पहले रिटायरमेंट की मांग की है। सीबीआई में अधीक्षक रैंक के अधिकारी धर्मवीर सिंह ने घोटाले की जांच कर रही एसआईटी के सदस्य के रूप में सेवामुक्त करने की मांग की है। सीबीआई के वकील ने शुक्रवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की एकल-न्यायाधीश पीठ को यह जानकारी दी।

सीबीआई के वकील ने कोर्ट के सामने क्या रखी बातें
सीबीआई के वकील ने न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय की पीठ को यह भी बताया कि चूंकि कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद एसआईटी का गठन किया गया था, सिंह की समयपूर्व सेवानिवृत्ति की याचिका को बाद की मंजूरी के बिना, आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। न्यायमूर्ति गंगोपाध्याय ने सीबीआई के वकील को मामले में जल्द से जल्द फैसला लेने का आश्वासन दिया। उन्होंने विशेष जांच दल में और बांग्ला भाषी अधिकारियों को शामिल करने का भी सुझाव दिया।

अब तक कितने लोगों का हुआ फेरबदल
पिछले साल नवंबर में जस्टिस गंगोपाध्याय ने इस मामले में सीबीआई द्वारा गठित पहले के विशेष जांच दल के पुनर्गठन का आदेश दिया था। उस फेरबदल में दो अधिकारियों, एक उप अधीक्षक और एक निरीक्षक को बदल दिया गया था, लेकिन धर्मवीर सिंह टीम के सदस्य के रूप में बने रहे। उस समय एसआईटी के पुनर्गठन का आदेश देते हुए जस्टिस गंगोपाध्याय ने कहा था कि जांच प्रणाली में तेजी लाने के लिए फेरबदल अनिवार्य हो गया था, जो उनके अनुसार उस समय बेहद धीमी गति से चल रही थी।


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