Bikram Majithia Granted Bail: पंजाब की शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) के वरिष्ठ नेता और पूर्व अकाली-भाजपा सरकार में मंत्री रह चुके Bikram Singh Majithia को मजीठा थाना विवाद मामले में बड़ी राहत मिली है। दरअसल कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। उनके साथ इस मामले में नामजद जोध सिंह समरा और जतिंदर पाल सिंह को भी जमानत मिल गई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Additional District and Sessions Judge) मोनिका शर्मा की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत के इस आदेश के बाद मजीठिया और उनके समर्थकों को राहत मिली है।
इस मामले में वकील बिक्रम सिंह बाठ का नाम भी शामिल किया गया था। हालांकि जांच के दौरान उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इसके बाद उन्हें निर्दोष मानते हुए मामले से बाहर कर दिया गया। बिक्रम सिंह बाठ पेशे से वकील हैं। वह अपने मुवक्किल जोबनप्रीत सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कॉपी लेने के लिए मजीठा थाने पहुंचे थे। बाद में पुलिस ने उनके खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया था, जिसका कई वकीलों ने विरोध किया।
Bikram Majithia Bail: वकीलों के प्रदर्शन के बाद बनी थी विशेष जांच टीम

वकीलों ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। अमृतसर बार एसोसिएशन के सदस्यों ने भी मामले को गंभीरता से उठाया। बढ़ते विरोध और विवाद को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी ने मामले की जांच की और पाया कि अधिवक्ता बिक्रम सिंह बाठ के खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं थे। इसके बाद उन्हें पूरी तरह राहत दे दी गई।
नगर निगम चुनाव के दौरान शुरू हुआ था विवाद

यह पूरा मामला नगर निगम चुनाव की मतगणना के दौरान सामने आया था। आरोप है कि अकाली दल समर्थक जोबनप्रीत सिंह को पुलिस ने हिरासत में लिया था। अकाली दल नेताओं का कहना था कि पुलिस ने उनके परिवार को इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी। इसी बात को लेकर बिक्रम सिंह मजीठिया अपने समर्थकों के साथ मजीठा थाने पहुंचे थे। वहां उन्होंने पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ धरना दिया और विरोध जताया।
Punjab News: पुलिस ने लगाए थे गंभीर आरोप
पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान मजीठिया और उनके समर्थक थाने के अंदर प्रवेश कर गए थे। पुलिस ने यह भी दावा किया कि उन्होंने हिरासत में लिए गए व्यक्ति को छुड़ाने की कोशिश की। इसके अलावा एक सब-इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन छीनने और थाने के कुछ जरूरी दस्तावेजों को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए गए थे। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
बचाव पक्ष ने कोर्ट में पुलिस के आरोपों को गलत बताया और कई कानूनी सवाल उठाए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मजीठिया और अन्य आरोपियों को जमानत दे दी। हालांकि जमानत मिलने के बावजूद मामले की जांच और कोर्ट में सुनवाई आगे भी जारी रहेगी। पंजाब की राजनीति में यह मामला काफी चर्चा में रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और कानूनी नजर बनी रहने की संभावना है।


Download Android App
Download iOS App




