लुधियाना-तलवंडीसाबो : अपने पहले धर्म प्रचार दौरे के दौरान उत्तराखंड स्थित हरि की पौड़ी गुरूद्वारे में पाखंडियों और कर्मकांड का खंडन करके प्रथम गुरू श्री गुरू नानक देव जी ने ज्ञान की रोशनी फैलाई थी, उसी स्थान पर गुरूद्वारा ज्ञानी गोदड़ी साहिब स्थापित हुआ था। पहले 1978 में गंगाघाट के सौंदर्यकरण के नाम पर गुरूद्वारा साहिब की दीवार तोड़ी गई और उसके बाद 1984 में देश के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कत्ल उपरांत सिख विरोधी लहर के चलते पावन स्थान को सोची-समझी साजिश के साथ गिरा दिया गया। आज उसी पावन स्थान पर भारत सरकार का स्काउट एंड गाइड का कार्यालय है और यह भी पता चला है कि इसी स्थान पर सार्वजनिक शौचालय भी बने हुए है। तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार भाई बलजीत सिंह दादूवाल ने दिल्ली कमेटी और शिरोमणि कमेटी द्वारा ज्ञान गोदड़ी की प्राप्ति के लिए सांझी मुहिम की अगुवाई श्री अकाल तख्त साहिब के मौजूदा जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह को सौंपे जाने पर ऐतराज करते हुए कहा कि इस मामले में अब तक की गई कार्यवाही को सियासी स्टंट कहा है। उनके मुताबिक यह कार्यवाही कौम द्वारा निकाले जा चुके जत्थेदार को आक्सीजन देने के बराबर है। उन्होंने गुरूद्वारा उसी स्थल पर बनाए जाने की मांग करते हुए कहा कि सिख संगत को गुरूद्वारे की पुन: निर्माण के लिए दोनों कमेटियां सहयोग करें ना की अगुवाई में कोई लेन-देन करें।
– सुनीलराय कामरेड


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