Punjab News: (पीजीआईएमईआर) Postgraduate Institute of Medical Education and Research चंडीगढ़ की शोध टीम ने पंचकूला स्थित Shri Jainendra Gurukul Senior Secondary School में किशोरों के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को सोशल मीडिया का सुरक्षित, जिम्मेदार और संतुलित उपयोग करने के लिए प्रेरित करना था। डिजिटल दौर में बढ़ते मोबाइल और इंटरनेट उपयोग के कारण युवाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई। इस अभियान के दौरान सोशल मीडिया के अधिक इस्तेमाल से होने वाले नुकसान, पारिवारिक संबंधों पर पड़ने वाले प्रभाव, ऑनलाइन शराब संबंधी कंटेंट और किशोरों के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि डिजिटल दुनिया का सही उपयोग करना कितना जरूरी है।
यह पहल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा समर्थित एक बड़े शोध प्रोजेक्ट का हिस्सा थी। इस परियोजना का नेतृत्व पीजीआईएमईआर के कम्युनिटी मेडिसिन एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर Dr. Tanvi Kiran कर रही हैं। कार्यक्रम को परियोजना टीम की सदस्य सुश्री दिव्या शर्मा, डॉ. आशराजदीप सिंह, श्री लक्ष्य जगलान और सुश्री तमन्ना ने संचालित किया। लगभग एक घंटे चले इस इंटरैक्टिव सत्र में 85 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
Punjab News: विद्यार्थियों को सहभागिता के जरिए दी जानकारी

कार्यक्रम को केवल भाषण तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि विद्यार्थियों को पोस्टर, प्रस्तुति और चर्चा के माध्यम से सक्रिय रूप से शामिल किया गया। इस तरीके से बच्चों को अपनी समस्याएं और अनुभव साझा करने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने खुलकर सोशल मीडिया से जुड़े अपने अनुभव बताए और डिजिटल दुनिया की चुनौतियों पर चर्चा की। सत्र के पहले भाग में बताया गया कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम परिवार के बीच संवाद को कमजोर कर सकता है।
बच्चों को समझाया गया कि लगातार मोबाइल में व्यस्त रहने से परिवार के सदस्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव कम हो जाता है। इस समस्या से बचने के लिए विद्यार्थियों को घर में स्क्रीन-फ्री एरिया बनाने, भोजन के समय मोबाइल से दूरी रखने और परिवार के साथ अधिक समय बिताने जैसी आदतें अपनाने की सलाह दी गई।
शराब संबंधी ऑनलाइन कंटेंट पर चर्चा
कार्यक्रम के दूसरे हिस्से में सोशल मीडिया पर बढ़ती इन्फ्लुएंसर संस्कृति और शराब को आकर्षक दिखाने वाले विज्ञापनों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि कम उम्र में शराब से जुड़े कंटेंट देखने से बच्चों के व्यवहार और सोच पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। विद्यार्थियों को सोशल मीडिया पर सही कंटेंट चुनने, कंटेंट फिल्टर का उपयोग करने और खेल, संगीत व अन्य ऑफलाइन गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
जोखिमपूर्ण ऑनलाइन व्यवहार से बचने की सलाह
अंतिम सत्र में सोशल मीडिया से जुड़े जोखिमपूर्ण यौन व्यवहार और गलत ऑनलाइन जानकारी के खतरों के बारे में जागरूक किया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि इंटरनेट पर मौजूद हर जानकारी सही नहीं होती। उन्हें केवल भरोसेमंद और विशेषज्ञ स्रोतों से ही जानकारी लेने की सलाह दी गई। साथ ही डिजिटल दुनिया में अपनी निजी सीमाएं बनाए रखने और सुरक्षित व्यवहार अपनाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में पीजीआईएमईआर टीम ने स्कूल के नोटिस बोर्ड पर जागरूकता पोस्टर लगाए। सत्र का समापन विद्यार्थियों के साथ प्रश्नोत्तर चर्चा के जरिए हुआ। इस पूरे आयोजन में स्कूल की प्राचार्या Mohita Jain और सामाजिक विज्ञान शिक्षक Major Singh का विशेष सहयोग रहा। यह पहल किशोरों को सुरक्षित डिजिटल जीवन की दिशा में जागरूक करने का एक प्रभावी प्रयास साबित हुई।
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