World Sleep Day 2026: देश में अक्सर कई घरों में अगर कोई व्यक्ति तेज खर्राटे लेता है तो लोग इसे गहरी और आरामदायक नींद का संकेत मान लेते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में यह एक गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। इस बीमारी को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह समस्या भारत में तेजी से बढ़ रही है और अब इसे एक “मौन महामारी” के रूप में देखा जा रहा है। विश्व नींद दिवस 2026 के मौके पर डॉक्टरों और स्लीप विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों का सही समय पर पता ही नहीं चल पाता।
World Sleep Day 2026: भारत में कितनी गंभीर है समस्या
डॉक्टरों के अनुसार भारत की करीब 9 से 13 प्रतिशत वयस्क आबादी स्लीप एपनिया से प्रभावित हो सकती है। इसका मतलब है कि देश में लगभग 10 करोड़ से ज्यादा लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि इनमें से बहुत कम लोगों का सही तरीके से परीक्षण या इलाज हो पाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों में जागरूकता की कमी और लक्षणों को नजरअंदाज करना इस समस्या को और बढ़ा रहा है।
क्या होता है स्लीप एपनिया?
स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें सोते समय व्यक्ति की सांस बार-बार रुक जाती है। जब सांस रुकती है तो शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है। इससे शरीर को बार-बार झटके के साथ जागना पड़ता है, जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती। इस स्थिति का लंबे समय तक बने रहना कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
अन्य बीमारियों से भी जुड़ा खतरा
स्लीप विशेषज्ञों का कहना है कि स्लीप एपनिया केवल नींद से जुड़ी समस्या नहीं है। यह कई गैर-संचारी बीमारियों से भी जुड़ा हुआ है। अगर इसका समय पर इलाज नहीं किया जाए तो इससे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ सकता है। डॉक्टरों के अनुसार शरीर में ऑक्सीजन की कमी हृदय और दिमाग पर नकारात्मक असर डालती है, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
सड़क सुरक्षा के लिए भी खतरा
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि स्लीप एपनिया सिर्फ व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ मामला है। इस बीमारी से पीड़ित लोगों को दिन के समय अत्यधिक नींद आती है, जिससे वाहन चलाते समय ध्यान भटक सकता है। इसी कारण डॉक्टरों ने सुझाव दिया है कि भारी वाहन चालकों के लिए विजन टेस्ट की तरह स्लीप स्क्रीनिंग भी अनिवार्य की जानी चाहिए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डॉक्टरों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति में कुछ खास लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
- रात के समय दिखाई देने वाले लक्षण
- बहुत तेज खर्राटे लेना
- नींद के दौरान सांस रुकना
- अचानक घुटन महसूस होने पर नींद खुल जाना
- दिन के समय दिखाई देने वाले लक्षण
- सुबह उठते ही सिरदर्द होना
- मुंह सूखना
- दिनभर थकान या नींद आना
- चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
इलाज संभव
अच्छी बात यह है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक की मदद से स्लीप एपनिया का प्रभावी इलाज किया जा सकता है। कई बड़े अस्पतालों में इसके लिए विशेष स्लीप लैब की सुविधा उपलब्ध है। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार CPAP थेरेपी, ओरल डिवाइस या वायुमार्ग सर्जरी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं। इन उपचारों से मरीज की नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है और स्वास्थ्य जोखिम भी कम हो जाते हैं।
जागरूकता है सबसे जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी से बचाव के लिए सबसे जरूरी है जागरूकता। अगर खर्राटे बहुत ज्यादा आते हैं या दिन में लगातार थकान महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज करने की बजाय डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से स्लीप एपनिया को नियंत्रित किया जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है।
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