Hindu Funeral Traditions: अंतिम संस्कार से पहले शव की नाक और कान में क्यों लगाई जाती है रुई? जानिए इसके पीछे का चौंकाने वाला सच!

Summary :

यह आर्टिकल हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव के नाक और कान में रुई या कफन का कपड़ा लगाने की परंपरा पर केंद्रित है। मृत्यु के बाद आत्मा शरीर छोड़ देती है, लेकिन शरीर में बची हुई ऊर्जा नौ खुले रास्तों (जैसे नाक, कान, आंखें) से बाहर निकलने की कोशिश करती है। शरीर की पवित्रता बनाए रखने के लिए इन रास्तों को बंद किया जाता है।

Hindu Funeral Traditions: हिंदू धर्म में इंसान के जन्म से लेकर उसके मृत्यु तक कई नियम और परंपराएं बनाए गए हैं। इन रिवाजों के पीछे कोई न कोई धार्मिक या वैज्ञानिक कारण जरूर होता है। आपने देखा होगा कि जब किसी की मृत्यु होती है, तो उसके शव की नाक और कान में रुई या कफ़न का कपड़ा लगा दिया जाता है। लेकिन सबके मन में ये सवाल आता है कि अंतिम संस्कार से पहले ऐसा क्यों किया जाता है? क्या यह सिर्फ एक पुरानी प्रथा है या इसके पीछे कोई गहरी वजह भी है? ‘गरुड़ पुराण’ और आयुर्वेद में इसके बारे में बहुत अच्छे से बताया गया है।

गरुड़ पुराण क्या कहता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद इंसान की आत्मा शरीर छोड़कर आगे बढ़ जाती है। हमारे शरीर में नौ खुले रास्ते (जैसे दो आंखें, दो कान, दो नाक के छेद, मुंह आदि) होते हैं। माना जाता है कि मृत्यु के बाद भी शरीर में बची हुई ऊर्जा इन्हीं खुले रास्तों से बाहर भागने की कोशिश करती है। इसलिए, शरीर की पवित्रता बनाए रखने के लिए नाक और कान बंद कर दिए जाते हैं।

क्या कहता है विज्ञान?

Dead Body
Dead Body (Source: Social Media)

इस परंपरा के पीछे एक बड़ा वैज्ञानिक कारण भी है। मेडिकल साइंस के अनुसार, मृत्यु के कुछ घंटे बाद शरीर प्राकृतिक रूप से खराब होने लगता है और पेट में गैसें बनने लगती हैं। अंगों के ढीले पड़ने की वजह से कई बार नाक या कान से पानी या गंदा तरल पदार्थ बाहर आने लगता है। घर आए रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों को किसी तरह का इन्फेक्शन न फैले, इसलिए सफाई और मृत शरीर के सम्मान के लिए इन अंगों को रुई से ढंक दिया जाता है।

हवा की आवाजाही रोकना

मृत्यु के बाद शरीर की नसें और मांसपेशियां पूरी तरह ढीली पड़ जाती हैं। अगर नाक और कान खुले रहें, तो बाहरी हवा तेजी से शरीर के अंदर प्रवेश करती है, जिससे शरीर फूलने और सड़ने की रफ्तार बहुत तेज हो जाती है। रुई लगाने से बाहरी हवा का संपर्क रुक जाता है और शरीर कुछ समय तक सही स्थिति में बना रहता है।

शरीर की सुरक्षा

पुरानी मान्यताओं के अनुसार, जब तक शव का अंतिम संस्कार न हो जाए, तब तक उस पर कीड़े-मकोड़े बैठने या कोई नकारात्मक शक्ति असर करने का डर रहता है। इसलिए भी रुई लगाकर शरीर की सुरक्षा की जाती है ताकि उसकी शांति और पवित्रता बनी रहे।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।