Suryakumar Yadav’s Biggest Regret: भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सूर्यकुमार यादव ने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने सबसे बड़े अफ़सोस के बारे में बात की. उन्होंने 18 जुलाई, 2021 को श्रीलंका के ख़िलाफ़ अपना वनडे डेब्यू किया था और 18 नवंबर, 2023 को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ अपना आखिरी वनडे मैच खेला था. अपने वनडे करियर के दौरान, उन्होंने 25.76 की औसत से 773 रन बनाए.
सूर्यकुमार यादव का बयान

अपने इंटरनेशनल करियर के बारे में बात करते हुए सूर्यकुमार यादव ने कहा कि उन्हें इस बात का एहसास है कि उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से पहले टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका मिला, लेकिन दोबारा खेलने का मौका नहीं मिल पाया, और यह उनके लिए सबसे बड़ी निराशाओं में से एक थी. इससे भी ज़्यादा, ODI फ़ॉर्मेट ने उन्हें सबसे ज़्यादा निराश किया. फ़ॉर्मेट की ज़रूरतों को जानने के बावजूद, वह इसमें वापसी करने में नाकाम रहे.
आकाश चोपड़ा के यूट्यूब चैनल पर SKY ने कहा,
“मान लीजिए, हम कुछ भी कह सकते हैं; अगर मैं 2016 में आया होता, तो मैंने टेस्ट मैच खेले होते और वनडे में भी अच्छा प्रदर्शन किया होता. लेकिन असलियत यह है कि टेस्ट क्रिकेट में, दूसरे खिलाड़ियों के वापस आने से पहले मैंने सिर्फ़ एक मैच और एक पारी खेली और मुझे दोबारा मौका नहीं मिला.”
“लेकिन वनडे क्रिकेट को लेकर, हाँ, मुझे खुद से ज़रूर निराशा है. यह T20 की तरह ही व्हाइट-बॉल फ़ॉर्मेट है, लेकिन सच कहूँ तो, मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि मैंने उतनी मेहनत नहीं की जितनी इस फ़ॉर्मेट के लिए ज़रूरी थी.”
वनडे बैटिंग की ज़रूरतें और आवश्यकताएं

पूर्व कप्तान का मानना है कि वनडे क्रिकेट की अपनी चुनौतियां हैं, जो दूसरे फ़ॉर्मेट से अलग हैं. इस फ़ॉर्मेट में पारी को आगे बढ़ाने और सही समय पर तेज़ी से रन बनाने के बीच संतुलन बनाना होता है—एक ऐसी चीज़ जिससे उन्हें अपने समय में जूझना पड़ा था.
उन्होंने कहा,
“मेरी राय में, बल्लेबाज़ के लिए वनडे क्रिकेट सबसे मुश्किल फ़ॉर्मेट है, चाहे आप बैटिंग ऑर्डर में नीचे खेलें या कहीं और.”
“मुझे लगता है कि मैं उस फ़ॉर्मेट के लिए सही तरीका नहीं ढूंढ पाया. भले ही मुझे पता था कि मैं शायद पांचवें या छठे नंबर पर बैटिंग करूंगा, फिर भी मैंने उस फ़ॉर्मेट में महारत हासिल करने के लिए काफ़ी मेहनत नहीं की.”

उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने घर पर अपने परिवार के साथ ODI को लेकर अपनी निराशा के बारे में बात की और माना कि तैयारी की कमी के कारण ही उनका प्रदर्शन खराब रहा.
“हम घर पर भी इस बारे में बात करते हैं. मेरी पत्नी मुझसे पूछती हैं, ‘क्या तुम्हें लगता है कि तुम और ज़्यादा ODI क्रिकेट खेल सकते थे?’ और मैं उनसे कहता हूँ, ‘हाँ, तुम सही कह रही हो, मैंने काफ़ी मेहनत नहीं की.’ अगर मैंने मेहनत नहीं की, तो मुझे नतीजे भी नहीं मिले. जहाँ मैंने मेहनत की, वहाँ मुझे अच्छे नतीजे मिले.”
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