जिंदा थी प्रीमेच्योर बच्ची, डाक्टरों ने कर दिया मृत घोषित, सही समय पर इलाज न मिलने से आखिरकार गई जान

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Bhopal Hospital Negligence : भोपाल से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक नवजात को डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह जीवित थी. इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, मामला 18 मार्च की शाम करीब 7:30 बजे का है, जब एक महिला ने प्रीमेच्योर बच्ची को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों को यह सूचना देने के साथ ही मृत्यु प्रमाण पत्र भी सौंप दिया गया, जिससे परिवार शोक में डूब गया। Hamidia Hospital…

Bhopal Hospital Negligence : भोपाल से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक नवजात को डॉक्टरों की लापरवाही के चलते मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह जीवित थी. इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, मामला 18 मार्च की शाम करीब 7:30 बजे का है, जब एक महिला ने प्रीमेच्योर बच्ची को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों को यह सूचना देने के साथ ही मृत्यु प्रमाण पत्र भी सौंप दिया गया, जिससे परिवार शोक में डूब गया।

Hamidia Hospital Bhopal: दफनाने से पहले सामने आया सच

Hamidia Hospital Bhopal
Hamidia Hospital Bhopal (Social Media)

परिजन बच्ची के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे और उसे कफन में लपेटकर रखा गया था। इसी दौरान अंतिम बार देखने के लिए जब कफन खोला गया, तो बच्ची के रोने की हल्की आवाज सुनाई दी। यह देख सभी हैरान रह गए और तुरंत उसे दोबारा अस्पताल ले जाया गया।

घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। बच्ची को तुरंत कमला नेहरू अस्पताल के NICU में भर्ती कराया गया, जहां रातभर इलाज चला। हालांकि समय पर सही इलाज न मिलने और प्रीमेच्योर जन्म के कारण उसकी हालत बिगड़ती गई और अंततः उसकी मृत्यु हो गई।

Bhopal Hospital Negligence: इलाज में लापरवाही के आरोप

परिजनों का आरोप है कि नवजात की सही तरीके से जांच नहीं की गई और जल्दबाजी में उसे मृत घोषित कर दिया गया। उनका यह भी कहना है कि जब उन्होंने घटना का वीडियो बनाने की कोशिश की, तो अस्पताल स्टाफ ने उन्हें रोकने का प्रयास किया।

बता दें परिवार के अनुसार, गर्भवती महिला को पहले स्थानीय अस्पताल, फिर रायसेन जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कहीं संतोषजनक इलाज नहीं मिला। अंततः उसे भोपाल रेफर किया गया, जहां दो दिन बाद प्रसव हुआ। इस पूरी घटना ने चिकित्सा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।