Biswan News: शैख़ुल औलिया हज़रत गुलज़ार शाह रह० अलैह के उर्स और मेले के अवसर पर बिसवां नगर में एक भव्य अंतरराष्ट्रीय मुशायरे का आयोजन किया गया। इस खास मौके पर देश और विदेश से आए मशहूर शायरों ने अपनी शायरी से समां बांध दिया। देर रात तक चले इस मुशायरे में बड़ी संख्या में शायरी प्रेमी मौजूद रहे और हर शेर पर जमकर तालियां बजीं।
Biswan News: मुशायरे की सदारत और संचालन
इस साहित्यिक महफिल की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर मास्टर तबस्सुम हुसैन कादरी ने की। वहीं, कार्यक्रम का सफल संचालन जाने-माने शायर नदीम फर्रुख ने किया। नदीम फर्रुख ने अपने प्रभावशाली शेर से मुशायरे की शुरुआत की, जिसमें पहचान और संघर्ष की बात कही गई। उनके शेर ने शुरुआत में ही माहौल को गंभीर और भावुक बना दिया।

International Mushairas: देश-विदेश से आए शायरों की शानदार प्रस्तुति
दुबई से आए शायर यासिर सिद्दीकी ने आपसी मतभेद और समाज में बढ़ती दूरियों पर तीखे शब्दों में शायरी पेश की। उनके शेरों ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। नेपाल से पहुंचे शायर सरवर नेपाली ने अपने अलग अंदाज़ में आज के दौर में बदलती सोच और व्यवहार को बयान किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
देशभक्ति, समाज और मोहब्बत की शायरी
जौहर कानपुरी ने देशभक्ति से भरी शायरी पेश की, जिसमें वतन से प्यार और जिम्मेदारी का भाव साफ नजर आया। मशहूर शायरा शबीना अदीब ने सामाजिक संदेश देते हुए इंसानियत, संवेदना और जरूरतमंदों की मदद पर आधारित शेर पढ़े, जिससे माहौल भावुक हो गया। अजहर इक़बाल ने रिश्तों की उलझनों और दिल की बेचैनी को अपने शेरों में उतारा, जिस पर श्रोताओं ने खूब वाहवाही की।

नई सोच और युवा आवाज
आदिल रशीद ने मोहब्बत और सियासत के फर्क को अपने अंदाज़ में पेश किया। वहीं, इल्मा हाशमी ने नई पीढ़ी की सोच और आत्मविश्वास को अपनी शायरी में खूबसूरती से पिरोया। हिमांशी बाबरा की दर्द भरी शायरी ने दिल को छू लिया और कई श्रोताओं की आंखें नम हो गईं।
जोश और खास अंदाज
तबर्रेज़ मुनव्वर राना और सतलज राहत इंदौरी ने अपने दमदार और प्रभावशाली शेरों से महफिल में जोश भर दिया। उनकी खास शैली ने श्रोताओं को बार-बार दाद देने पर मजबूर किया। इसके अलावा अल्ताफ ज़िया, हाशिम फिरोजाबादी, शरीफ भारती और शाइस्ता सना ने भी अपनी शायरी से कार्यक्रम को और यादगार बना दिया।

आयोजन में रही बड़ी भागीदारी
इस अवसर पर मेला अध्यक्ष अब्दुल मसर्रत अली, सेक्रेटरी सैय्यद हुसैन कादरी, कार्यवाहक अध्यक्ष महबूब अली, मुशायरा संयोजक डॉ. अहमद अली अंसारी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। मुशायरा देर रात तक चला और बिसवां के इतिहास में एक यादगार साहित्यिक आयोजन के रूप में दर्ज हो गया।


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