200 डॉलर प्रति बैरल पहुंचेगी कच्चे तेल की कीमत! आसमान छूने लगेंगे पेट्रोल-डीजल के रेट, जानें भारत में कितना पड़ेगा असर

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Crude Oil Crisis Impact On India: मिडिल ईस्ट में जंग के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उबाल आया है। जिससे पूरे बाजार में हलचल मच गई है इसी बीच ईरान ने पूरे विश्व को चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो केंद्र सरकार का वार्षिक अतिरिक्त खर्चा 3.6 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। अगर 200 डॉलर प्रति बैरल कीमत होती है तो भारत में…

Crude Oil Crisis Impact On India: मिडिल ईस्ट में जंग के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उबाल आया है। जिससे पूरे बाजार में हलचल मच गई है इसी बीच ईरान ने पूरे विश्व को चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में कच्चे तेल की कीमतें 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो केंद्र सरकार का वार्षिक अतिरिक्त खर्चा 3.6 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है। अगर 200 डॉलर प्रति बैरल कीमत होती है तो भारत में पेट्रोल डीजल के रेट आसमान छूने लगेंगे। जानें कितना पड़ेगा इसका असर

200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है

ईरान ने पूरी दुनिया को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच सकती है। भारत लगभग 80 प्रतिशत तक तेल का आय़ात करता है जिससे अर्थव्यवस्था को करारा झटका लग सकता है। माना जा रहा है कि 200 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने पर पेट्रोल 177 रुपये प्रति लीटर और डीजल 168 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता है।

भारत का चालू खाता घाटा बढ़ेगा

रिपोर्ट कहा गया कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष में तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं, जिससे एशिया का ऊर्जा संकट और गहरा सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधा उत्पन्न हो सकता है। ऐसी हालात में जहां ब्रेंट क्रूड वित्त वर्ष 2027 के अंत तक 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहता है, भारत का चालू खाता घाटा (सीए) जीडीपी के 2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इस दौरान अमेरिकी डॉलर भारतीय डॉलर का अनुपात और कमजोर होकर 94-95 तक पहुंच सकता है, जबकि केंद्र सरकार का वार्षिक अतिरिक्त खर्च 3.6 ट्रिलियन रुपये प्रति वर्ष बढ़ जाएगा।

राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है

इन घटनाक्रमों का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है और इससे राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। इस अनुमान में पेट्रोल और डीजल पर तेल कंपनियों द्वारा सामना किए जा रहे कम मुनाफे की भरपाई के लिए सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में कटौती को शामिल किया गया है। इसमें एलपीजी पर अधिक सब्सिडी को भी ध्यान में रखा गया है। 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के करीब तेल की कीमतों के साथ संघर्ष का प्रत्येक अतिरिक्त महीना केंद्र के राजकोषीय खर्च में लगभग 30000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर सकता है, जो मुख्य रूप से तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगा।

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Himanshu Negi

हिमांशू नेगी को देश-विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने GGSIPU से संबद्ध LLDIMS कॉलेज से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन (BJMC) की पढ़ाई की है। इसके बाद HNBGU Central University से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MAJMC) पूरा किया और पत्रकारिता की शुरुआत की। दैनिक जागरण और IJCP Pvt Ltd. में इंटर्नशिप करने के बाद उन्होंने सुदर्शन टीवी चैनल में 9 PM शो के लिए प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।