कोटद्वार शहर में बढ़े हिन्दू मुस्लिम तनाव की असल वजह क्या है, क्यों हुआ दीपक कुमार पर मुकदमा?

Summary :

Deepak Kumar Kotdwar Story : ‘मेरा नाम मोहम्मद दीपक है’ यह लाइन इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों की चर्चाओं में खूब सुनने को आ रहा है। इसकी वजह, खुद दीपक कुमार कश्यप हैं, जिन्होंने दिल्ली से लगभग 250 किलोमीटर दूर उत्तराखंड के कोटद्वार शहर में एक बुजुर्ग मुस्लिम विक्रेता को दुकान का नाम बदलवाने आए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से बचाया। देखते ही देखते 2-4 दिनों के भीतर मामला धार्मिक तनाव से भर गया और इलाके में भारी पुलिस दल बल लगानी पड़ी। इस मामले में नई अपडेट यह है कि जो मामला कथित बदसलूकी और विरोध…

Deepak Kumar Kotdwar Story : ‘मेरा नाम मोहम्मद दीपक है’ यह लाइन इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों की चर्चाओं में खूब सुनने को आ रहा है। इसकी वजह, खुद दीपक कुमार कश्यप हैं, जिन्होंने दिल्ली से लगभग 250 किलोमीटर दूर उत्तराखंड के कोटद्वार शहर में एक बुजुर्ग मुस्लिम विक्रेता को दुकान का नाम बदलवाने आए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से बचाया। देखते ही देखते 2-4 दिनों के भीतर मामला धार्मिक तनाव से भर गया और इलाके में भारी पुलिस दल बल लगानी पड़ी।

इस मामले में नई अपडेट यह है कि जो मामला कथित बदसलूकी और विरोध तक सीमित था वह अब पुलिस कार्यवाही, FIR, प्रशासन की सख्ती तक पहुंच गया है। पूरे मामले में दोनों तरफ के पक्षों, यानी दीपक कुमार और बजरंग दल के अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज हुई है।

Baba Dress Shop : क्या है पूरा मामला

Deepak Kumar Kotdwar Story
Deepak Kumar Kotdwar Story (SOURCE : SOCIAL MEDIA)

दिल्ली से पोड़ी जिला जाने के लिए उत्तराखंड का जो द्वार पड़ता है उसका मुहाना कोटद्वार शहर पर खुलता है। यह शहर उत्तरप्रदेश के नजीमाबाद शहर से छूता है। कोटद्वार शहर में एक छोटी आबादी मुस्लिम समाज की भी है जो अपने गुजर बसर के लिए रेहड़ी पटरी, छोटी दुकानों पर आश्रित हैं। इन्हीं में से एक मुस्लिम दुकानदार कोटद्वार के पटेल मार्ग पर छोटे बच्चों के स्कूल यूनिफॉर्म की दुकान चलाते हैं, जिन्होंने अपनी दुकान का नाम ‘बाबा ड्रैसिंग’ रखा है।

मामला इसी दुकान से शुरू होता है जब 26 जनवरी को बजरंग दल के कार्यकर्ता इस दुकान के नाम से बाबा हटाने को कहते हैं। हल्की फुलकी बात सख्ती पर आ जाती है। इतने में यहाँ दीपक कुमार की एंट्री होती है और मुस्लिम विक्रेता के समर्थन में दलील देने लगते हैं। जब बजरंग दल के कार्यकर्ता उन्हे बीच में न पड़ने को कहते हैं और उनसे उनका नाम पूछते हैं तो वे खुद का नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताते हैं।

इस मामले के बाद 31 जनवरी को दीपक के जिम के बाहर बजरंग दल की कौल पर कई लोग इकट्ठा होते हैं, और शहर में धार्मिक तनाव फैल जाता है, जिसके बाद बीच बचाव में भारी पुलिस तैनात करनी पड़ती है।

Hindu Youth Muslim Identity : बाबा नाम से मशहूर सिद्धबलि बाबा

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दरअसल, बजरंग दल जिस नाम को हटाने पर अड़े थे वह नाम शहर के चर्चित मंदिर ‘सिद्धबली’ के नाम पर है। बजरंग दल की दलील थी कि उनके मंदिर के नाम पर मुस्लिम विक्रेता के दुकान का नाम नहीं हो सकता। जिस पर दीपक का कहना था कि ‘बाबा’ शब्द मुस्लिमों में भी प्रचलित है।

वीडियो वायरल होते ही मामला गर्म हो गया और की बजरंग दल के कार्यकर्ता सड़कों पर उतार आए।

Communal Tension Kotdwar : शहर में तनाव और पुलिस कार्यवाही

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Deepak Kumar Kotdwar Story (SOURCE : SOCIAL MEDIA)

पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक FIR पुलिस की ओर से शांति व्यवस्था भंग करने वाले 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया है। इन्हीं अज्ञात लोगों ने बवाल की शुरुआत की थी। दूसरी एफआईआर कोटद्वार के रहने वाले वकील अहमद और तीसरी एफआईआर एक अन्य स्थानीय नागरिक कमल प्रसाद ने दर्ज करवाई है।

पुलिस के मुताबिक, दर्जनों कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरियर हटाकर उग्र नारेबाजी और गाली-गलौच करते हुए सांप्रदायिक तनाव पैदा कर दिया। लगभग 30–40 अज्ञात लोगों ने पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करके सरकारी कार्य में बाधा डाली। पुलिस ने बताया कि इससे सार्वजनिक व्यवस्था एवं सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हुआ। इस बवाल के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस कोतवाली कोटद्वार में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली।

Mohammad Deepak Kumar : दीपक कुमार और साथियों पर केस

पुलिस ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि एक अन्य मामला कोटद्वार निवासी वकील अहमद की तहरीर पर BNS की धारा 115(2), 333, 351(2), 352 के तहत किया गया है। तीसरा मामला कमल पाल की तहरीर पर जिम संचालक दीपक उर्फ अक्की, विजय रावत एवं उनके साथियों के खिलाफ गाली-गलौच करते हुए जाति-सूचक शब्दों का प्रयोग करने और जान से मारने की नीयत से हमला करने के संबंध में दर्ज किया गया है। पुलिस के इस मामले में दखल देने के बाद अभी मामला शांत है।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।