India Iran Diplomacy: खाड़ी देशों में जंग के बीच तेल और गैस का संकट गहरा गया है। इसी बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़े नए घटनाक्रमों पर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची के साथ विस्तार से बातचीत की है। बता दें कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे मौजूदा संघर्ष के बाद दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बातचीत थी इससे पहले जयशंकर ने 28 फरवरी और 5 मार्च को अरघची से बात की थी।
India Iran Diplomacy: बातचीत राजनयिक पहल को दर्शाती है
पश्चिम एशिया में तनाव के चरम पर होने के बावजूद भारत की सक्रिय बातचीत राजनयिक पहल को दर्शाती है। ईरान, अमेरिका और इज़रायल से जुड़े बढ़ते संकट के बीच दोनों मंत्रियों के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ताओं में से यह एक है। भारत ने लगातार तनाव कम करने, संयम बरतने, संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ने का मार्ग बताया है, साथ ही क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है और निर्बाध ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रहे
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं, जिनमें व्यापार, ऊर्जा और चाबहार बंदरगाह जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं में सहयोग शामिल है। यह बातचीत भारत के संतुलित दृष्टिकोण की पृष्ठभूमि में हो रही है: हाल के घटनाक्रमों पर गहरी चिंता व्यक्त करना, जहां उचित हो वहां हानि के प्रति संवेदना व्यक्त करना और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध को रोकने के लिए राजनयिक समाधानों पर जोर देना।
भारत की चिंताओं को व्यक्त किया
इससे पहले फरवरी और मार्च की शुरुआत में हुई फोन कॉल सहित कई मुलाकातों में जयशंकर ने बदलती स्थिति के बारे में भारत की चिंताओं को व्यक्त किया था और नागरिक सुरक्षा पर जोर दिया था। सार्वजनिक बयान में चर्चा के बारे में और कोई जानकारी नहीं दी गई, लेकिन संपर्क में बने रहने पर जोर देना इस बात का संकेत है कि संकट पर बारीकी से नजर रखने और भारत के हितों की रक्षा करने के प्रयासों के बीच विदेश मंत्री स्तर पर निरंतर बातचीत जारी है।
ALSO READ: ट्रंप ने की मुकेश अंबानी के साथ 300 अरब डॉलर की डील, अमेरिका में रिलायंस इंडस्ट्रीज करेगा निवेश


Download Android App
Download iOS App




