‘न टूटा हौसला, न ही कोई खौफ …’, जंग के बीच ईरानी प्रोफेसर ने खंडहर में बैठकर ली क्लास

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Iran Sharif University News: ईरान में जारी तनाव के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हमले और तबाही के माहौल में भी शिक्षा के प्रति समर्पण और जज़्बा कम नहीं हुआ है। तेहरान स्थित Sharif University of Technology से आई यह घटना हिम्मत और उम्मीद की एक मजबूत मिसाल बन गई है। बता दें, कि हाल ही में ‘अमेरिकी-ज़ायोनी आतंकी हमले’ (US-Zionist attack) से यूनिवर्सिटी का आईटी और कम्युनिकेशन सेंटर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। जहां पहले आधुनिक तकनीक और रिसर्च का माहौल था, वहां अब सिर्फ टूटे…

Iran Sharif University News: ईरान में जारी तनाव के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया को सोचने पर मजबूर कर दिया है। हमले और तबाही के माहौल में भी शिक्षा के प्रति समर्पण और जज़्बा कम नहीं हुआ है। तेहरान स्थित Sharif University of Technology से आई यह घटना हिम्मत और उम्मीद की एक मजबूत मिसाल बन गई है। बता दें, कि हाल ही में ‘अमेरिकी-ज़ायोनी आतंकी हमले’ (US-Zionist attack) से यूनिवर्सिटी का आईटी और कम्युनिकेशन सेंटर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।

जहां पहले आधुनिक तकनीक और रिसर्च का माहौल था, वहां अब सिर्फ टूटे हुए ढांचे और मलबा दिखाई देता है। लेकिन इस तबाही के बावजूद पढ़ाई नहीं रुकी। यूनिवर्सिटी के आईटी हेड और गणित के प्रोफेसर ने उसी खंडहर के बीच एक टूटी हुई मेज पर लैपटॉप रखकर अपनी ऑनलाइन क्लास शुरू कर दी। यह दृश्य सिर्फ एक क्लास का नहीं, बल्कि शिक्षा के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक था।

Iran Sharif University News: मुश्किल हालात में भी नहीं टूटा हौसला

आम तौर पर जब किसी संस्था को इतना बड़ा नुकसान होता है, तो वहां सन्नाटा छा जाता है। लोग डर जाते हैं और काम ठप हो जाता है। लेकिन यहां ठीक उल्टा हुआ। हमले के बाद भी वहां गणित की पढ़ाई जारी रही। यह दिखाता है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। इस घटना ने यह साबित किया कि शिक्षा सिर्फ इमारतों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि लोगों के जज़्बे पर टिकी होती है।

युद्ध के माहौल में मानसिक दबाव

ईरान में चल रहे तनाव और संभावित हमलों की वजह से वहां के लोगों पर मानसिक दबाव भी बढ़ा है। खासकर हाल के बयानों में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा दी गई धमकियों ने माहौल को और गंभीर बना दिया है। ऐसे समय में आम लोग डर और असुरक्षा महसूस करते हैं। कई लोग सुरक्षित जगहों की तलाश में निकल जाते हैं या घरों में ही रहने लगते हैं। लेकिन इन शिक्षकों ने इस डर को खुद पर हावी नहीं होने दिया।

खंडहर में बैठकर क्लास लेना सिर्फ पढ़ाई जारी रखना नहीं था, बल्कि यह एक संदेश भी था। यह संदेश था कि ज्ञान और शिक्षा को किसी भी हालत में रोका नहीं जा सकता। इस कदम ने दुनिया को यह दिखाया कि मुश्किल परिस्थितियों में भी इंसान अपनी जिम्मेदारियों को निभा सकता है। यह घटना उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो कठिनाइयों के सामने हार मान लेते हैं।

हिम्मत और उम्मीद की मिसाल

Sharif University of Technology की यह घटना बताती है कि असली ताकत इमारतों में नहीं, बल्कि लोगों के इरादों में होती है। मिसाइलें ढांचे को गिरा सकती हैं, लेकिन सीखने की चाह को खत्म नहीं कर सकतीं। यह कहानी सिर्फ ईरान की नहीं, बल्कि हर उस जगह की है जहां लोग मुश्किलों के बावजूद आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। शिक्षा का यह जज़्बा ही किसी भी देश के भविष्य को मजबूत बनाता है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।