10 दिन, 93,00,00,00,000 डॉलर खर्च, फिर भी चांद पर नहीं उतरेंगे अंतरिक्ष यात्री! जानें क्यों खास है ये मिशन?

NASA Artemis II Mission

NASA Artemis II Mission: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने मून मिशन Artemis II के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्रियों को अमेरिका के फ्लोरिडा से अंतरिक्ष में भेजा गया है। लगभग तीन साल की कठिन ट्रेनिंग के बाद ये अंतरिक्ष यात्री इस ऐतिहासिक मिशन का हिस्सा बने हैं। यह मिशन करीब 10 दिनों तक चलेगा और कई मायनों में बेहद खास माना जा रहा है।

NASA Artemis II Mission: चांद पर नहीं उतरेंगे अंतरिक्ष यात्री


इस मिशन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की परिक्रमा तो करेंगे, लेकिन उसकी सतह पर उतरेंगे नहीं। इसका कारण यह है कि यह मिशन सीधे लैंडिंग के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के बड़े मिशनों की तैयारी के लिए डिजाइन किया गया है। NASA इस मिशन के जरिए अपने सिस्टम, तकनीक और अंतरिक्ष यात्रियों की क्षमताओं को परखना चाहता है।

आर्टेमिस प्रोग्राम का असली मकसद

Artemis Program का उद्देश्य केवल चांद पर पहुंचना ही नहीं है, बल्कि वहां स्थायी बेस बनाने की दिशा में काम करना भी है। इससे भविष्य में इंसानों के लंबे समय तक चांद पर रहने और आगे मंगल जैसे ग्रहों की यात्रा की संभावनाएं मजबूत होंगी।

पहले मिशन से क्या सीखा गया?

नवंबर 2022 में लॉन्च हुए Artemis I मिशन के दौरान बिना चालक दल के रॉकेट और कैप्सूल का परीक्षण किया गया था। उस मिशन से मिली जानकारी के आधार पर अब Artemis II में मानवों के साथ सिस्टम की जांच की जा रही है। इस बार खासतौर पर SLS रॉकेट और ओरियन कैप्सूल के लाइफ सपोर्ट सिस्टम की परफॉर्मेंस पर ध्यान दिया जा रहा है।

सुरक्षा और तकनीक की होगी जांच

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरिक्ष यान के सभी सिस्टम अंतरिक्ष में सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं। NASA के अधिकारियों के अनुसार, सबसे पहली प्राथमिकता अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है। इसके साथ ही नेविगेशन सिस्टम और ऑनबोर्ड तकनीकों का भी गहराई से परीक्षण किया जाएगा।

आगे के मिशन क्या होंगे?

Artemis II के बाद आने वाले मिशनों में और भी बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं। Artemis III में चंद्रमा पर उतरने की तैयारी की जाएगी, जबकि आगे के मिशनों में वहां स्थायी ढांचा तैयार करने की दिशा में काम होगा। इस तरह Artemis II भविष्य के मिशनों की नींव तैयार कर रहा है।

कितना हुआ खर्च?

इस पूरे प्रोग्राम पर भारी खर्च किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 तक Artemis प्रोग्राम की कुल लागत लगभग 93 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 7.7 लाख करोड़ रुपये के बराबर है। इस मिशन के लिए फंडिंग मुख्य रूप से अमेरिकी सरकार और करदाताओं से आती है।

इस मिशन में कई बड़ी एयरोस्पेस कंपनियां भी शामिल हैं। Boeing, Northrop Grumman और Lockheed Martin जैसी कंपनियां रॉकेट और अंतरिक्ष यान के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इन कंपनियों को सरकारी अनुबंधों के जरिए भुगतान किया जाता है।

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