बता दें यह पिस्टल 9mm की कॉम्पैक्ट और हाई-टेक मानी जाती है, जिसे दुनिया के कई देशों में सुरक्षा एजेंसियां इस्तेमाल करती हैं. भारत में इसकी आम बिक्री नहीं होती, लेकिन ड्रोन तस्करी और अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए यह अपराधियों तक पहुंच रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 40 हजार रुपये के आसपास होती है, जबकि भारत के अवैध बाजार में यह कई लाख रुपये में बिकती है. हैरानी यह कि इसी पिस्टल का इस्तेमाल अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रम्प को मारने के लिए भी किया गया था. ऐसे में जानना जरूरी है कि आखिर यह हमलावरों की पसंदीदा पिस्टल क्यों बन गई हिया?
छोटी इतनी की रखने में आसान
इस पिस्टल की खासियत इसका साइज है. यह लगभग 9.9 mm की पिस्टल है जिसे आसानी से छुपा कर रखा जा सकता है. इसक वजन काफी हल्का होता है. इसकी बनावट काफी छोटी होती है जिसे कैरी करना आसान होता है. इसमें 9.9 mm की पावर होती है, यह फायरिंग के समय भरोसेमंद होती है. यह इतनी स्लिम होती है कि कम कपडे पहने हों तो भी छुपाया जा सकता है.
मैक्सिमम परफोर्मेंस
बता दें इसे ग्लोक कम्पनी बनाती है. जिसका सेंटर आस्ट्रिया में है. यह 919 कैलिबर वाली बन्दूक है. इसकी मग्जीन क्षमता 10+1 है. मैगजीन की कुल लम्बाई 165 mm है. ऊंचाई लगभग 5 mm है. इसका वजन लगभग 530 ग्राम के आसपास है. यानि बाकी पिस्टल के मुकाबले हलकी मानी जाती है.
2 वर्जन में उपलब्ध
इस पिस्टल में 2 वर्जन आते हैं, एक स्टैंडर्ड और दूसरा mos. स्टैंडर्ड बेस वर्जन है. जिसमें ओपन साइट्रस दी जाती हैं. mos वर्जन में एक कट दिया जाता है जिसमें रेड डॉट साईट आसानी से लगाईं जा सकती है. विदेश में इसकी कीमत लगभग 40 हजार के आसपास है. यानी बहुत महंगी भी नहीं आती है. वहीं अवैध बाजार में इसकी कीमत करीबन 5-8 लाख के आसपास बैठती है.
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