UK Rejects US Hormuz Blockade Plan: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। दरअसल एक तरफ जहां अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर दबाव बनाने के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी में है, वहीं उसका करीबी सहयोगी ब्रिटेन इससे दूरी बनाता नजर आ रहा है। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने साफ कर दिया है कि उनका देश होर्मुज स्ट्रेट पर किसी भी तरह के ब्लॉकेड का समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन का उद्देश्य तनाव बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थिति को सामान्य बनाना है। स्टार्मर ने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रिटेन किसी सैन्य संघर्ष में शामिल नहीं होना चाहता। उनके मुताबिक, किसी भी युद्ध में उतरने के लिए मजबूत कानूनी आधार और स्पष्ट रणनीति जरूरी होती है, जो इस समय नजर नहीं आ रही।
UK Rejects US Hormuz Blockade Plan: ट्रंप के दावे को लगा झटका

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले दावा किया था कि उनके सहयोगी देश भी इस कदम में उनका साथ देंगे। लेकिन ब्रिटेन के रुख ने इस दावे को कमजोर कर दिया है। ब्रिटेन का यह फैसला बताता है कि पश्चिमी देशों के बीच इस मुद्दे पर पूरी एकजुटता नहीं है। इससे अमेरिका की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है।
खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में तेल इसी रास्ते से दुनिया भर में पहुंचता है। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही रुकती है, तो इसका सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यही कारण है कि कई देश इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर जोर देते हैं।
ब्रिटेन का फोकस: सुरक्षा और स्थिरता
ब्रिटेन ने साफ किया है कि वह इस क्षेत्र में अपने संसाधनों का इस्तेमाल युद्ध के लिए नहीं, बल्कि समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए करेगा। स्टार्मर के अनुसार, ब्रिटेन के पास इस इलाके में माइनस्वीपर जहाज मौजूद हैं, जिनका मकसद खतरों को कम करना और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। यानी ब्रिटेन का झुकाव कूटनीति और शांति की ओर है।
UK Rejects US Hormuz Blockade Plan: अमेरिका की सख्त रणनीति

अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह ईरान पर दबाव बनाने के लिए होर्मुज स्ट्रेट में सख्त कदम उठा सकता है। योजना के तहत ईरान के बंदरगाहों से जुड़े जहाजों की निगरानी और जरूरत पड़ने पर उन्हें रोका जा सकता है। हालांकि, अमेरिका का कहना है कि जो जहाज अन्य देशों के लिए जा रहे हैं, उन्हें इस कार्रवाई से प्रभावित नहीं किया जाएगा।
ईरान की कड़ी चेतावनी
Islamic Revolutionary Guard Corps ने अमेरिका के संभावित कदम पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर कोई सैन्य जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पास आता है, तो उसे उकसावे की कार्रवाई माना जाएगा और जवाब दिया जाएगा। ईरान ने अमेरिका के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है और इसे “समुद्री डकैती” जैसा कदम करार दिया है। ईरान ने यह भी कहा है कि अगर उसके बंदरगाहों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र के बंदरगाह खतरे में आ सकते हैं। इससे साफ है कि हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं।
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