West Bengal Assembly Elections: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने कोलकाता में पार्टी का घोषणापत्र जारी कर दिया है। इस घोषणा पत्र में पार्टी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने पर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का वादा किया है। बता दें कि असम के बाद पश्चिम बंगाल दूसरा ऐसा राज्य है जहां बीजेपी ने चुनाव के दौरान यूसीसी लागू करने की बात कही है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब पार्टी ने इस मुद्दे को चुनावी एजेंडा बनाया हो।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी लंबे समय से पूरे देश में एक समान नागरिक कानून लागू करने की पक्षधर रही है। पार्टी का मानना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए एक जैसा कानून बनेगा और भेदभाव खत्म होगा। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी हाल ही में पार्टी के स्थापना दिवस पर “सेक्युलर सिविल कोड” की बात करते हुए कहा कि इससे संविधान की मूल भावना को मजबूती मिलेगी।
West Bengal Assembly Elections: दशकों पुरानी विचारधारा
समान नागरिक संहिता बीजेपी के प्रमुख वैचारिक मुद्दों में से एक रहा है। पार्टी के तीन बड़े एजेंडे, Article 370 को हटाना, Ram Mandir का निर्माण, और UCC लागू करना, लंबे समय से उसकी प्राथमिकताओं में शामिल रहे हैं। इनमें से दो वादे पार्टी पहले ही पूरे कर चुकी है, लेकिन UCC अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर लागू नहीं हो पाया है। अगर बीजेपी के पुराने चुनावी घोषणापत्रों पर नजर डालें तो UCC का मुद्दा हमेशा एक जैसा नहीं रहा। 1996 के घोषणापत्र में इसका जिक्र था, लेकिन 1998 और 1999 में यह मुद्दा पीछे चला गया। इसकी मुख्य वजह उस समय की गठबंधन सरकार थी, जिसमें कई क्षेत्रीय दल शामिल थे और सभी इस मुद्दे से सहमत नहीं थे।
गठबंधन की राजनीति का असर
पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee के नेतृत्व में 1998 में बनी सरकार में कई सहयोगी दल शामिल थे। इनमें से कुछ दल UCC के पक्ष में नहीं थे, जिसके कारण इस मुद्दे को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। बाद में जब बीजेपी विपक्ष में रही, तब उसने समय-समय पर इस विषय को उठाया।
2014 के बाद की स्थिति
2014 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आने के बाद बीजेपी ने अपने प्रमुख एजेंडों को आगे बढ़ाया। 2019 और 2024 के चुनावी घोषणापत्रों में भी UCC को प्रमुखता दी गई। हालांकि, 2024 में सरकार का बहुमत पहले जितना मजबूत नहीं रहा और उसे सहयोगी दलों का समर्थन लेना पड़ा। इन सहयोगी दलों में Nitish Kumar और N Chandrababu Naidu जैसे नेता शामिल हैं, जिनकी राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक भी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए ये दल UCC को लेकर सावधानी बरतते रहे हैं और व्यापक चर्चा की मांग करते हैं।
राज्यों के जरिए नई रणनीति
केंद्र में आने वाली राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए बीजेपी ने एक नई रणनीति अपनाई है। अब पार्टी राज्य स्तर पर UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस रणनीति के तहत पहले उन राज्यों में कानून लागू किया जा रहा है जहां बीजेपी की सरकार है। जनवरी 2025 में Uttarakhand देश का पहला राज्य बना जिसने UCC लागू किया। इसके बाद मार्च 2026 में Gujarat ने भी इस दिशा में कानून पारित किया।
अन्य राज्यों में तैयारी
बीजेपी ने असम विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में भी सरकार बनने के तीन महीने के भीतर UCC लागू करने का वादा किया है। इसके अलावा, आने वाले उत्तर प्रदेश चुनावों में भी यह मुद्दा प्रमुख रहने की संभावना है। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी राज्य में UCC लागू करने का लक्ष्य तय किया है।
राष्ट्रीय स्तर की ओर बढ़ता कदम
केंद्र में गठबंधन की मजबूरियों के चलते फिलहाल UCC को पूरे देश में लागू करना आसान नहीं है। लेकिन बीजेपी राज्य सरकारों के जरिए इस दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। पार्टी की कोशिश है कि जब ज्यादा से ज्यादा राज्यों में यह कानून लागू हो जाएगा, तब इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करना आसान हो जाएगा।
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