ईरान सरेंडर के करीब? G7 बैठक में ट्रंप का बड़ा दावा, कहा ‘अब ज्यादा देर नहीं टिक पाएगा तेहरान’

Will Iran Surrender

Will Iran Surrender : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा दावा किया है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समूह G7 के नेताओं के साथ हुई वर्चुअल बैठक में कहा कि ईरान अब आत्मसमर्पण के बेहद करीब पहुंच चुका है।

बताया जा रहा है कि यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान अमेरिका के बीच युद्ध 28 फरवरी से लगातार चल रहा है। जिस चलते पूरी दुनिया लपेटे में आ गई है।

G7 बैठक में ट्रंप का बड़ा दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, G7 देशों के नेताओं के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि हालिया सैन्य अभियानों के बाद ईरान की स्थिति काफी कमजोर हो गई है। उनका दावा था कि लगातार दबाव और सैन्य कार्रवाई के कारण तेहरान के लिए लंबे समय तक संघर्ष जारी रखना मुश्किल होगा। हालांकि, इस दावे पर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

‘सफल’ रहा सैन्य अभियान: ट्रंप

ट्रंप ने बैठक में यह भी कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इजरायल द्वारा चलाया गया सैन्य अभियान काफी प्रभावी रहा है। उनके मुताबिक इस ऑपरेशन ने क्षेत्र में मौजूद बड़े खतरे को काफी हद तक कम किया है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मौजूदा समय में ईरान की नेतृत्व व्यवस्था अव्यवस्थित हो चुकी है और वहां कोई ऐसा नेता नहीं बचा है जो औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण की घोषणा कर सके।

क्या है G7 समूह

Group of Seven दुनिया की सात प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का मंच है। इसमें यूएस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और जापान शामिल हैं। यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े अहम मुद्दों पर नियमित रूप से चर्चा करता है।

पहले भी दे चुके हैं ‘अनकंडीशनल सरेंडर’ की चेतावनी

यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इससे पहले भी उन्होंने साफ कहा था कि किसी भी तरह की बातचीत तभी संभव है जब ईरान बिना शर्त आत्मसमर्पण करे। ट्रंप के इन बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक G7 देशों के नेताओं के बीच भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ नेताओं को उम्मीद है कि यह दबाव युद्ध को खत्म करने की दिशा में कदम हो सकता है, जबकि कुछ को डर है कि इससे संघर्ष और लंबा खिंच सकता है।

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