Aditya L-1 अब सूरज पर जाएगा भारत का अंतरिक्ष यान, जानें क्या है मिशन आदित्य L1

Summary :

चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत अब अपने दूसरे मिशन की तैयारी कर रहा है क्योंकी इसरो की अब सूरज पर जाने की तैयारी है। इसलिए इसरो शनिवार को सूरज पर स्टडी के लिए अंतरिक्ष यान भेज रहा है। स्टडी के लिए आदित्य-एल1 अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। आदित्य-एल1 पूरी तरह स्वदेशी है। इसे दो हफ्ते पहले आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित इसरो के अंतरिक्ष केंद्र पर लाया गया था।

चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत अब अपने दूसरे मिशन की तैयारी कर रहा है क्योंकी इसरो की अब सूरज पर जाने की तैयारी है। इसलिए इसरो शनिवार को सूरज पर स्टडी के लिए अंतरिक्ष यान भेज रहा है। स्टडी के लिए आदित्य-एल1 अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। आदित्य-एल1 पूरी तरह स्वदेशी है। इसे दो हफ्ते पहले आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित इसरो के अंतरिक्ष केंद्र पर लाया गया था।
2 सितंबर को किया जाएगा लांच
2 सितंबर को इसे यहीं से लांच कर दिया जाएगा। बता दें L1 तक पहुंचने में इसे चार महीने लगेंगे। इसी साल इसरो गगनयान 1 मिशन लॉन्च  भी करने वाला है। उसके बाद 2024 में शुक्रयान और मंगलयान मिशन भेजने की भी योजना है।
आदित्य एल-1 की खासियत
आदित्य एल-1 के बारे में बात करें तो सूर्य के अध्ययन के लिए पहली भारतीय अंतरिक्ष आधारित ऑब्जर्वेटरी होगी। इसका काम सूरज पर 24 घंटे नजर रखना होगा। धरती और सूरज के सिस्टम के बीच पांच Lagrangian point हैं। सूर्ययान Lagrangian point 1 के चारों ओर एक हेलो ऑर्बिट में तैनात रहेगा। L1 पॉइंट की धरती से दूरी 1.5 मिलियन किमी है जबकि सूर्य की पृथ्वी से दूरी 150 मिलियन किमी है। एल 1 पॉइंट इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां से सूर्य पर सातों दिन चौबीसों घंटे नजर रखी जा सकती है, ग्रहण के दौरान भी।
सूर्य की स्टडी करेगा सूर्ययान
इसके बाद आदित्य एल-1 को इस स्टडी से क्या हासिल होगा इसको लेकर बात करें तो अंतरिक्ष यान सात पेलोड लेकर जाएगा। ये पेलोड फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर (सूर्य की दिखाई देने वाली सतह से ठीक ऊपरी सतह) और सूर्य की सबसे बाहरी परत का जायजा लेंगे। सूर्य में होने वाली विस्फोटक प्रक्रियाएं पृथ्वी के नजदीकी स्पेस एरिया में दिक्कत कर सकती हैं। बहुत से उपग्रहों को नुकसान हो सकता है। ऐसी प्रक्रियाओं का पता पहले चल जाए तो बचाव के कदम उठा सकते हैं। तमाम स्पेस मिशनों को चलाने के लिए स्पेस के मौसम को समझना जरूरी है। इस मिशन से स्पेस के मौसम को भी समझने में मदद मिल सकती है। इससे सौर हवाओं की भी स्टडी की जाएगी।
इसरो के लिए ये मिशन बेहद मुश्किल
इसरो के लिए ये मिशन बेहद मुश्किल होगा क्योंकी सूर्य के पास आदित्य एल-1 को ले जाना काफी मुश्किल होगा। लेकिन इस मिशन को सफल करने के लिए इसरो रात दिन मेहनत कर रहा है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि ये मिशन जरुर पूरा होगा।
पीएम मोदी ने इसरो जाकर वैज्ञानिकों से की थी बात
पीएम मोदी बीते दिनों सबसे इसरो सेंटर पहुंचे थे और वहां उन्होंने भाषण दिया था। इस दौरान उन्होंने 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित किया था। इसके साथ ही जिस बिंदु पर चंद्रयान-3 लैंडर उतरा उसे “शिवशक्ति” प्वाइंट घोषित किया गया था । पीएम ने वैज्ञानिकों को बधाईयां देते हुए उनका हौसला भी बढाया था।

Desk Team