आयुर्वेद Vs एलोपैथ पर बढ़ी तकरार, IMA ने योग गुरु रामदेव को दी खुली बहस की चुनौती

आईएमए ने एक बयान जारी कर पूछा है कि रामदेव उन एलोपैथिक अस्पतालों के नाम बताएं, जहां पर कोरोना के इलाज के नाम पर पतंजलि की दवाएं दी गईं।

एलोपैथिक पर की गई टिप्पणी को लेकर योग गुरु बाबा रामदेव को 1000 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने अब खुली बहस की चुनौती दी है। आईएमए ने शनिवार को एक बयान जारी कर पूछा है कि रामदेव उन एलोपैथिक अस्पतालों के नाम बताएं, जहां पर कोरोना के इलाज के नाम पर पतंजलि की दवाएं दी गईं।
दरअसल योग गुरु ने एक टीवी डिबेट में दावा किया था कि एलोपैथिक अस्पताल भी कोरोना इलाज के लिए पतंजलि की दवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। अब IMA ने इसे चुनौती देते हुए कहा है कि बाबा रामदेव खुले मंच पर इस दावे को साबित करें और आईएमए से पूरे विवाद पर बहस करें।  
इसके आलावा स्वामी रामदेव ने दावा किया था कि एलोपैथी ने महज 10 फीसदी गंभीर मरीजों का इलाज किया, वहीं बाकी 90 फीसदी संक्रमित योग और आयुर्वेद से ठीक हुए। उन्होंने कहा था कि इस कोरोना महामारी से लाखों लोगों की जान डॉक्टरों ने नहीं बल्कि नेचुरोपैथी और योग ने बचाई है।

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इससे पहले बाबा रामदेव ने कहा था कि वह IMA से 25 प्रश्नों पर जवाब चाहते हैं। रामदेव ने इसके लिए IMA को खुली चिट्ठी भी लिखी थी। रामदेव की ओर से भेजे पत्र पर जवाब देते हुए IMA ने कहा है कि वह अपने पैनल के साथ इन 25 प्रश्नों के जवाब के लिए भी तैयार है। इसके बाद से आयुर्वेद बनाम एलोपैथ का मुद्दा बड़े स्तर पर गर्माता जा रहा है।
अभी दो दिन पहले ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने रामदेव को 1000 करोड़ रुपए का मानहानि का नोटिस देते हुए 15 दिनों में अपने बयान पर खंडन का वीडियो और लिखित माफी की मांग की है। आईएमए ने योग गुरु की इस टिप्पणी को ऐलोपैथी तथा आईएमए से जुड़े करीब 2000 चिकित्सकों की प्रतिष्ठा और छवि के लिए नुकसानदायक बताया है। 

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