सुप्रीम कोर्ट से फटकार लगने के बाद सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण के मानदंडों की समीक्षा के लिए 3 सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की। समिति में पूर्व वित्त सचिव अजय भूषण पांडे, सदस्य सचिव आईसीएसएसआर प्रो वीके मल्होत्रा और भारत सरकार के प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल शामिल होंगे।
देश में अपनाए गए विभिन्न दृष्टिकोणों की जांच करेगी समिति
समिति आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की पहचान के लिए देश में अब तक अपनाए गए विभिन्न दृष्टिकोणों की जांच करेगी। यह अगले 3 सप्ताह में अपनी सिफारिशें केंद्र को भी भेजेगी। संयुक्त सचिव आरपी मीणा द्वारा हस्ताक्षरित मंत्रालय द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि समिति का गठन आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के निर्धारण के मानदंडों पर फिर से विचार करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को दी गई “प्रतिबद्धता के अनुसार” किया जा रहा है।
पिछले हफ्ते केंद्र ने पुनः विचार को दी थी मंजूरी
पिछले हफ्ते, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि वह आरक्षण लाभ के लिए पात्र होने के लिए ईडब्ल्यूएस के लिए 8 लाख रुपये वार्षिक आय मानदंड पर फिर से विचार करेगी। एनईईटी उम्मीदवारों ने 29 जुलाई की अधिसूचना को चुनौती देने के बाद यह मुद्दा उठाया था, जिसमें ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत कोटा और अखिल भारतीय कोटा श्रेणी के तहत ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की गई थी।
मामले में फैसला आने तक रोकी गयी थी NEET काउंसलिंग
सरकार ने कोर्ट से कहा कि नीट की काउंसलिंग तब तक के लिए टाल दी जाएगी जब तक इस मामले पर फैसला नहीं हो जाता। पिछली सुनवाई में, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सवाल किया था कि ईडब्ल्यूएस कोटा के लिए अधिकतम आय सीमा के रूप में 8 लाख रुपये का आंकड़ा कैसे आया।
सरकार ने पूर्व में ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को आगे बढ़ाने के लिए 2010 की सिंहो आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया था। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट रूप से ईडब्ल्यूएस के लिए कोटा की सिफारिश नहीं की थी, लेकिन कहा था कि उन्हें कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच मिलनी चाहिए।


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