तमिलनाडु सरकार ने बुधवार को मद्रास उच्च न्यायालय में दलील दी कि दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी नहीं थीं क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने उनके खिलाफ आरोपों को खत्म कर दिया है इसलिए उनकी स्मृति में स्मारक के निर्माण पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
यहां मरीना बीच पर स्मारक के विरोध वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता विजय नारायण ने न्यायमूर्ति एम. सत्यनारायणन और न्यायमूर्ति पी राजामणिकम की पीठ के समक्ष यह दलील दी। हालांकि दलीलें सुनने के बाद पीठ ने वकील एम एल रवि द्वारा दायर याचिका पर आदेश सुरक्षित रखा।
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याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जयललिता को मामले में दोषी ठहराया गया था और इसलिए सरकार को उनके लिये स्मारक नहीं बनाना चाहिए।
याचिका का विरोध करते हुए महाधिवक्ता ने दलील दी कि जयललिता को आय से अधिक संपत्ति के मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बरी कर दिया था। जयललिता पर बतौर मुख्यमंत्री उनके पहले कार्यकाल 1991-96 के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप था।
हालांकि पांच दिसंबर 2016 को उनकी मृत्यु के बाद उच्चतम न्यायालय ने फरवरी 2017 में उनके खिलाफ आरोपों को खत्म कर दिया था।


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