पार्टी के रुख से अलग राय व्यक्त करते हुए कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने बुधवार को कहा कि वह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का विरोध करते हैं क्योंकि यह ‘‘बांटने वाला’’ है। उन्होंने आरक्षण पर न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने के द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के फैसले का स्वागत किया।
संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता- न्यायालय
न्यायालय ने सोमवार को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण 3-2 के बहुमत से बरकरार रखते हुए कहा था कि यह भेदभावपूर्ण नहीं था और संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता।

कांग्रेस ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया था और कहा था कि इसके लिए मार्ग प्रशस्त करने वाला संशोधन मनमोहन सिंह सरकार द्वारा शुरू की गई प्रक्रिया का परिणाम था।
चिदंबरम ने ट्वीट ने कहा…
चिदंबरम ने ट्विटर पर कहा, “मैं ईडब्ल्यूएस कोटा का विरोध करता हूं क्योंकि यह बांटने वाला है और सभी समावेशी नहीं है।” शिवगंगा से लोकसभा सदस्य ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘‘यदि ‘आर्थिक’ मानदंड लागू किया जाता है, तो यह ‘जाति’ के आधार पर लोगों को बाहर नहीं कर सकता है, यह ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर मेरी मौलिक आपत्ति है।’’ द्रमुक पदाधिकारी के उस ट्वीट को ‘टैग’ करते हुए, जिसमें कहा गया था कि उनकी पार्टी (द्रमुक) एक पुनर्विचार याचिका दायर करेगी, चिदंबरम ने कहा कि वह इस पहल का स्वागत करते हैं।


Download Android App
Download iOS App



