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अग्निवीर भर्ती के लिए जाति प्रमाणपत्र मांगे जाने पर विपक्ष ने उठाए सवाल, BJP बोली- हर चीज में मोदी को दोष देने की सनक

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आवेदकों से जाति और धर्म प्रमाण पत्र मांगे जाने पर केंद्र सरकार को घेरते हुए पूछा कि आपको ‘अग्निवीर बनाना है या जातिवीर?’

अग्निपथ योजना के तहत होने वाली भर्ती में जाति प्रमाण पत्र और धर्म प्रमाण पत्र मांगने को लेकर सियासी दलों ने बवाल शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आवेदकों से जाति और  धर्म प्रमाण पत्र मांगे जाने पर केंद्र सरकार को घेरते हुए पूछा कि आपको ‘अग्निवीर बनाना है या जातिवीर?’
आप नेता संजय सिंह ने अग्निवीर के तहत भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आदेश की प्रति शेयर करते हुए लिखा, मोदी सरकार का घटिया चेहरा देश के सामने आ चुका है। क्या मोदी जी दलितों/पिछड़ों/आदिवासियों को सेना भर्ती के क़ाबिल नही मानते? भारत के इतिहास में पहली बार “सेना भर्ती “ में जाति पूछी जा रही है। मोदी जी आपको “अग्निवीर” बनाना है या “जातिवीर”

जाति/धर्म देखकर सैनिकों की छँटनी करेगी सरकार 

आरजेडी नेता और बिहार के विधायक दल के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इसपर सवाल खड़े करते हुए हमला बोला। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद 75 वर्षों तक सेना में ठेके पर “अग्निपथ” व्यवस्था लागू नहीं थी। सेना में भर्ती होने के बाद 75% सैनिकों की छँटनी नहीं होती थी लेकिन संघ की कट्टर जातिवादी सरकार अब जाति/धर्म देखकर 75% सैनिकों की छँटनी करेगी। सेना में जब आरक्षण है ही नहीं तो जाति प्रमाणपत्र की क्या जरूरत?

आरोपों पर सेना का जवाब
विपक्षी नेताओं के आरोपों पर सेना की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आई है। सेना ने आरोपों का खंडन कर साफ कर दिया है कि सेना में किसी भी भर्ती में पहले भी उम्मीदवारों से जाति प्रमाण पत्र और धर्म प्रमाण पत्र मांगा जाता था। इसको लेकर अग्निपथ योजना में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

BJP ने दी प्रतिक्रिया
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने आरोपों पर ट्वीट करते हुए कहा कि सेना ने 2013 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर एक हलफनामे में स्पष्ट किया है कि वह जाति, क्षेत्र और धर्म के आधार पर भर्ती नहीं करती है। हालाँकि इसने प्रशासनिक सुविधा और परिचालन आवश्यकताओं के लिए एक क्षेत्र से आने वाले लोगों के समूह को एक रेजिमेंट में उचित ठहराया।


उन्होंने कहा कि हर चीज के लिए पीएम मोदी को दोष देने की इस सनक का मतलब है कि संजय सिंह जैसे लोग हर दिन मुंह में पैर रखते हैं। सेना की रेजीमेंट प्रणाली अंग्रेजों के जमाने से ही अस्तित्व में है। स्वतंत्रता के बाद, इसे 1949 में एक विशेष सेना आदेश के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया था। मोदी सरकार ने कुछ नहीं बदला।

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