कोरोना वायरस (कोविड-19) के प्रसार को रोकने के लिए लागू देशव्यापी लॉकडाउन के बीच सुप्रीम कोर्ट में मकान मालिकों के खिलाफ याचिका दायर की गई है। याचिका में लॉकडाउन के दौरान छात्रों और कामगारों पर जबरन किराया देने का दबाव बना रहे मकान मालिकों के खिलाफ कार्यवाई की मांग की गई है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 29 मार्च को एक आदेश जारी कर कहा था कि मकान मालिक लॉकडाउन के दौरान एक महीने तक किसी भी छात्र, कामगारों और प्रवासी मजदूरों से किराया न मांगें। मंत्रालय ने एक बयान में चेतावनी दी थी कि जो मकान मालिक इस दौरान मकान खाली करने का दबाव बनाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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आपदा प्रबंधन कानून के तहत जारी आदेश में कहा गया था कि नियोक्ता अपने कर्मचारियों को देय तिथियों में बिना किसी कटौती के वेतन का भुगतान करेंगे। अधिवक्ता पवन प्रकाश पाठक और अन्य द्वारा दायर याचिका में गृह मंत्रालय के 29 मार्च के आदेश के क्रियान्वयन का आग्रह किया गया है जिसमें कहा गया है कि कोई भी मकान मालिक कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान एक महीने तक छात्रों और मजदूरों से किराया नहीं मांगेगा और उल्लंघन करने वालों को दंड दिया जाएगा।
जनहित याचिका में कहा गया है कि गृह मंत्रालय के आदेश के बावजूद अनेक मकान मालिक छात्रों और मजदूरों से पूरा किराया देने को कह रहे हैं और ऐसा न करने पर मकान से निकालने की धमकी दे रहे हैं।


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