पीएम मोदी ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

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महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें नमन किया।

महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें नमन किया। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि मैं महान लोकमान्य तिलक को उनकी जयंती पर नमन करता हूं। उनके विचार और सिद्धांत वर्तमान परिस्थितियों में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं, जब 130 करोड़ भारतीयों ने एक आत्मनिर्भर भारत बनाने का फैसला किया है जो आर्थिक रूप से समृद्ध और सामाजिक रूप से प्रगतिशील है।
साथ ही कहा कि लोकमान्य तिलक भारतीय मूल्यों और लोकाचार में दृढ़ विश्वास रखते थे। शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर उनके विचार कई लोगों को प्रेरित करते रहते हैं। वो एक संस्था निर्माता थे, जिन्होंने कई उच्च गुणवत्ता वाले संस्थानों का पोषण किया, जिन्होंने वर्षों में अग्रणी काम किया है।


इसके अलावा प्रधानमंत्री ने भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद को उनकी जयंती पर नमन किया। पीएम ने कहा कि अपनी युवावस्था के दौरान उन्होंने भारत को साम्राज्यवाद के चंगुल से मुक्त कराने में खुद को झोंक दिया। वो एक भविष्यवादी विचारक भी थे और एक मजबूत और न्यायपूर्ण भारत का सपना देखते थे।

गृहमंत्री अमित शाह ने भी किया नमन
गृहमंत्री अमित शाह ने महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की जयंती पर ट्वीट कर कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी ने स्वराज के नारे को चरितार्थ करने के लिए अपना पूरा जीवन खपा दिया और स्वतंत्रता आंदोलन को जन आंदोलन में बदलकर नई दिशा दी। वें अस्पृश्यता के प्रबल विरोधी थे और राष्ट्रवाद को ही राष्ट्रधर्म मानते थेसाथ ही कहा कि लोकमान्य तिलक जी ने स्वभाषा व स्वसंस्कृति के अपने विचारों व सिद्धांतो से भारतीय समाज में एक नई चेतना जागृत करने का काम किया। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस समय थे. ऐसे अप्रतिम राष्ट्र नायक की जयंती पर उनके चरणों में कोटि-कोटि वंदन।


इसके अलावा गृहमंत्री अमित शाह ने चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर ट्वीट कर कहा कि चंद्रशेखर आजाद का शौर्य ऐसा था कि अंग्रेज भी उनके सामने नतमस्तक हो जाते थे। आजाद ने बचपन से ही आजाद भारत के विचार को जिया व चरितार्थ किया और अंतिम सांस तक आजाद रहे। उनके बलिदान ने स्वाधीनता की जो लौ जगाई, वो आज हर भारतवासी के ह्रदय में देशभक्ति की अमर ज्वाला बन धधक रही है।

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