राहुल गांधी ने प्रश्नपत्र में विवादित अंशों को लेकर CBSE पर साधा निशाना, कहा- ये BJP की साजिश

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राहुल गांधी ने 10वीं कक्षा की परीक्षा के अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र के कुछ अंशों को लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पर सोमवार को निशाना साधा।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की एक प्रश्न पर राजनीतिक बवाल शुरु हो गया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने 10वीं कक्षा की परीक्षा के अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र के कुछ अंशों को लेकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पर सोमवार को निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह युवाओं की नैतिक शक्ति तथा भविष्य को कुचलने की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की साजिश है। 
राहुल का ट्वीट- सरकार पर आरोप 

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘सीबीएसई के ज्यादातर प्रश्नपत्र अब तक बहुत कठिन रहे हैं और अंग्रेजी के प्रश्नपत्र में गद्यांश पूरी तरह खराब है। यह युवाओं की नैतिक शक्ति और भविष्य को कुचलने का आरएसएस-भाजपा का षड्यंत्र है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बच्चों, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करो। कड़ी मेहनत का फल मिलता है। कट्टरता से कुछ हासिल नहीं होता।’’ 
सोनिया गांधी ने भी लोकसभा में के दौरान उठाया मुद्दा  
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी यह विषय सोमवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उठाया। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं कक्षा के अंग्रेजी के प्रश्नपत्र के अंशों में ”लैंगिक रूढ़िवादिता” को कथित तौर पर बढ़ावा दिए जाने और ”प्रतिगामी धारणाओं” का समर्थन करने संबंधी आरोपों के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इसके चलते बोर्ड ने रविवार को इस मामले को विषय के विशेषज्ञों के पास भेज दिया। 
उन्होंने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह शिक्षा के मानकों और परीक्षण में खराब स्तर को दर्शाता है और सशक्त तथा प्रगतिशील समाज के खिलाफ है।सोनिया गांधी ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए और उक्त प्रश्नपत्र को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।  
वह कोई नई परंपरा शुरू नहीं कर सकते 
उन्होंने कहा कि संपूर्ण समीक्षा की जाए ताकि भविष्य में ऐसा कभी नहीं हो।कांग्रेस अध्यक्ष ने शिक्षा मंत्रालय से पाठ्यक्रम में लैंगिक समानता के मानकों की भी समीक्षा करने की मांग की। इसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने सदन में सरकार से इस विषय पर जवाब की मांग की, हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि वह कोई नई परंपरा शुरू नहीं कर सकते।  
ये है पूरा मामला 
गत शनिवार को आयोजित 10वीं की परीक्षा में प्रश्नपत्र में कथित तौर पर ”महिलाओं की मुक्ति ने बच्चों पर माता-पिता के अधिकार को समाप्त कर दिया” और ”अपने पति के तौर-तरीके को स्वीकार करके ही एक मां अपने से छोटों से सम्मान पा सकती है” जैसे वाक्यों के उपयोग को लेकर आपत्ति जतायी गई है।

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