हैदराबाद : उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को कहा कि देश में एक के बाद एक बनी सरकारें एकीकृत बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) और मिड डे मील कार्यक्रम समेत कई योजनाएं भले ही लेकर आई हों लेकिन देश में कुपोषण का प्रभाव अब भी है। एंडोक्राइन को बाधित करने वाले रसायनों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के विदाई भाषण सत्र में नायडू ने कहा कि लगातार बदल रहे खान-पान, पोषण को लेकर बढ़ रही जागरुकता और स्वास्थ्य सूचना मिलने के चलते कई खाद्य पदार्थों की वैज्ञानिक रूप से प्रमाणीकृत डेटाबेस की मांग उठ रही है।
उन्होंने कहा, “सरकारें एकीकृत बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) और मिड डे मील कार्यक्रम समेत कई योजनाएं भले ही लेकर आई हों लेकिन देश में कुपोषण अब भी प्रबल है।” नायडू ने कहा, “मुझे लगता है कि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं एवं आयोजकों को कुपोषण की समस्या से विपटने के लिए नयी रणनीति अपनाने का समय आ गया है।” 2018 के वैश्विक भूख सूचकांक में 119 देशों में भारत 103वें स्थान पर था और यहां पोषण से संबंधी कई चुनौतियां हैं।


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