कोरोना महामारी को रोकने के लिए राज्यसभा में लगाए गए अल्ट्रावायलेट रेडियेशन उपकरण: वेंकैया नायडू

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को कहा कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सदन के कक्षों में अल्ट्रावायलेट सीट-बैंड रेडियेशन उपकरण लगाए गए हैं।

देश में अभी भी वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का हमला खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में संसद के उच्च सदन राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को कहा कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सदन के कक्षों में अल्ट्रावायलेट सीट-बैंड रेडियेशन उपकरण लगाए गए हैं। 
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन, नायडू ने बैठक शुरू होने पर कहा ‘‘यह सूचित करते हुए मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है कि सचिवालय ने हाल ही में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सदन के कक्षों में अल्ट्रावायलेट सीट-बैंड रेडियेशन उपकरण लगाए गए हैं। ये उपकरण वायरस को समाप्त करने में बहुत ही उपयोगी हैं।’’  
हमें अभी भी सावधान रहने की जरूरत है 
यह प्रौद्योगिकी सीएसआईआर-सीएसआईओ ने विकसित की है। नायडू ने कहा कि महामारी की तीसरी लहर के दौरान, बजट सत्र के पहले चरण में दोनों सदनों में दो पालियों में कामकाज हुआ और उसी के अनुरूप बैठक व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा ‘‘हमें अभी भी सावधान रहने की जरूरत है। कुछ सदस्य सदन की दीर्घाओं में बैठ रहे हैं। मैं आप सभी से सदन के अंदर और बाहर कोविड अनुकूल आचरण का पालन करने का अनुरोध करता हूं।’’ 
रूसी हमले से बुरी तरह प्रभावित पूर्वी यूरोपीय देश यूक्रेन से भारतीयों, खास कर छात्रों की वापसी को एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य बताते हुए सभापति ने कहा ‘‘भारत सरकार न केवल अपने देश के नागरिकों को ले कर आई बल्कि दूसरे देशों के कुछ छात्रों को भी उसने युद्धग्रस्त देश से सुरक्षित निकाला। यह प्रयास सराहनीय हैं।’’ वर्ष 2022-23 के लिए विभिन्न मंत्रालयों की अनुपूरक मांगों पर गौर करने के लिए विभाग संबंधी स्थायी संसदीय समितियों को 30 दिन का समय मिला। यह समय संसद के बजट सत्र के पहले चरण और दूसरे चरण के बीच का है।  
पिछले साल की तुलना में इस साल बैठकों में औसत उपस्थिति में कमी आई है 
सभापति ने बताया कि इस दौरान आठों संसदीय समितियों ने 21 बैठकें की जिनमें 73 घंटे 33 मिनट का समय लगा। इन बैठकों में 18 मंत्रालयों के 32 विभागों के लिए अनुपूरक मांगों पर विचार किया गया। उन्होंने कहा ‘‘यह बताते हुए मुझे खुशी हो रही है कि इन 21 बैठकों में औसतन 3 घंटे 30 मिनट का समय लगा जो बहुत ही बेहतर है। ’’ सभापति ने यह भी कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल बैठकों में औसत उपस्थिति में कमी आई है। उन्होंने कहा ‘‘मैं समझता हूं कि इसका बड़ा कारण पांच राज्यों में हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव हैं।’’  
चुनाव महत्वपूर्ण हैं लेकिन बैठकें भी महत्व रखती हैं 
उन्होंने कहा कि कुछ समितियों के अध्यक्षों ने उनसे मिल कर कम उपस्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा ‘‘सदस्यों को उनकी पृष्ठभूमि और दिलचस्पी के अनुसार समितियों के लिए मनोनीत किया जाना चाहिए। सदस्यों को प्राथमिकता के आधार पर बैठकों में शामिल होना चाहिए। चुनाव महत्वपूर्ण हैं लेकिन बैठकें भी महत्व रखती हैं।’’ नायडू ने कहा कि संसद के बजट सत्र के पहले चरण में मात्र दस बैठकें तय थीं और उससे पहले के सत्रों में व्यवधान की वजह से बार बार बैठक बाधित हुई। 
पहले चरण में व्यवधान न होने की वजह से सदन में 101.40 प्रतिशत कामकाज हुआ था जो सराहनीय है। उन्होंने सदस्यों से दूसरे चरण के लिए तय 19 बैठकों में ‘‘सकारात्मक भावना’’ से काम करने का अनुरोध करते हुए कहा पिछले साल बजट सत्र में 94 फीसदी कामकाज हुआ था जो इस बार अधिक होना चाहिए।

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