केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ग्रामीण और शहरी भारत के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को समर्थन देने के लिए ‘पीएम विश्वकर्मा’ योजना को मंजूरी दे दी। इस योजना की शुरुआत की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 77वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के दौरान की थी।
इस योजना के तहत शर्तों पर एक लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद रेलवे, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस योजना का वित्तीय परिव्यय 13,000 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा, इस योजना के तहत शर्तों पर एक लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि यह योजना लोगों को पारंपरिक कौशल से सशक्त बनाएगी, आने वाले दिनों में, हम विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर एक योजना शुरू करेंगे।
जानिए इस स्कीम का लाभ कौन-कौन से लोग उठा सकते है
जिससे पारंपरिक शिल्प कौशल में कुशल व्यक्तियों, विशेष रूप से ओबीसी समुदाय को लाभ होगा। बुनकरों, सुनारों, लोहारों, कपड़े धोने वाले श्रमिकों, नाई और ऐसे परिवारों को विश्वकर्मा योजना के माध्यम से सशक्त बनाया जाएगा, पीएम ने कहा, पीएम विश्वकर्मा योजना का उद्देश्य कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता, पैमाने और पहुंच में सुधार करना और उन्हें घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखला के साथ एकीकृत करना है। इसके परिणामस्वरूप ऐसे श्रमिकों, विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े समुदायों, महिलाओं, ट्रांसजेंडर और समाज के अन्य कमजोर वर्गों से संबंधित लोगों का आर्थिक सशक्तिकरण होगा।


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