उपराष्ट्रपति धनखड़ बोले: कोई भी देश अलग-थलग रहकर विकास नहीं कर सकता, सहयोग और साझेदारी ही विकल्प

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को जलवायु परिवर्तन का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी देश अलग-थलग रहकर प्रगति नहीं कर सकता और वैश्विक शांति तथा विकास के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को जलवायु परिवर्तन का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी देश अलग-थलग रहकर प्रगति नहीं कर सकता और वैश्विक शांति तथा विकास के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन यह साबित करने का जीता-जागता उदाहरण है कि दुनिया एक है और मानवता के सुरक्षित भविष्य के लिए जलवायु परिवर्तन के खतरों का सामूहिक रूप से मुकाबला करना होगा।
उपराष्ट्रपति ने यहां ‘फ्रांस-इंडिया फाउंडेशन’ के युवा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता के लोकाचार ने हमेशा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (दुनिया एक परिवार है) के विचार को बढ़ावा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है को रेखांकित करते हुए धनखड़ ने कहा, हमें एक ऐसी दुनिया में रहना है जहां सहयोग और साझेदारी ही विकल्प हैं।” 
उपराष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, धनखड़ ने कहा कि भारत में एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाया गया है, जहां हर युवा या महिला अपनी क्षमता का पूरी तरह से उपयोग करने में सक्षम है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत ने आधुनिकता की दिशा में अभूतपूर्व रूप से एक बड़ा कदम उठाया है और एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। बातचीत के दौरान, उपराष्ट्रपति ने दोनों देशों के युवा नेताओं से मानवता के व्यापक लाभ के लिए सामाजिक और आर्थिक विकास के सिलसिले में मिलकर काम करने को कहा।

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