भारत अपने हर मिशन को पूरा करने के लिए अपने कोशिशों के हदों को पार तक कर देता है। हाल फ़िलहाल में ही इसरो द्वारा चंद्रयान 3 लांच किया गया जो की अब चन्द्रमा के कक्ष में पहुँच चुकी है। जो की कई हद तक सफल होते हुए दिख रहा है, लेकिन आजकल मिशन समुद्रयान काफी चर्चा में आ गया है। जिसके बाद आम जनता के बीच एक ही सवाल उमड़ कर आ रहा है की आखिरकार “मिशन सुंदरयान” है क्या? जिसको लेकर देश के हर कोने में चर्चा की जा रही है, अगर आपके मन भी कुछ ऐसा ही सवाल है तो आज का ये लेख आपके लिए काफी मददगार साबित होगा। चलिए जानते हैं की “मिशन समुद्रयान” क्या है?
“मतस्य 6000” के पीछे का रहस्य
अमेरिका, चीन और कई अन्य विकसित देशों की तरह ही भारत अब अंतरिक्ष के साथ-साथ पाताल लोक की रहसयमयी गुत्थी को सुलझाने की कोशिश में जुट गया है। अपने अंतरिक्ष के सफर के बाद भारत अब समुद्री रहस्य की गहराई को जानने के लिए निकलने वाला है। बता दें की हाल ही में राजयसभा से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा ही की हमारा देश जल्द ही अपने पहले महासागर मिशन “समुद्रयान” के तहत मानवयुक्त पनडुब्बी को समुद्र की गहराई में भेजेगा। जहां इस पनडुब्बी में तीन व्यक्ति सवार रहेंगे जो की समुद्र के 6000 मीटर की गहराई तक जाएगा। जिस वजह से इस पनडुब्बी का नाम “मतस्य 6000” रखा गया है।
क्या है ‘मिशन समुद्रयान’ ?
29 अक्टूबर, 2021 के दिन केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने “मिशन समुद्रयान” लांच किया था। और इस मिशन की शुरुआत ब्लू इकॉनमी के तहत की गयी थी। यह भारत का पहला ऐसा समुद्री मिशन है जिसमें पनडुब्बी के साथ-साथ मानव भी समुद्र की गहराई में जाएंगे। और समुद्री रहस्यों पर से पर्दा उठाएंगे। इस मिशन का मकसद समुद्र के नीचे पाई जाने वाली जैव विविधता और साधन के बारे में रिसर्च करना है। इस मिशन की ख़ास बात ये है की इसमें सबमर्सिबल का इस्तेमाल सिर्फ एक्सप्लोरेशन के लिए किया जाएगा, ताकि पारिस्थितिक तंत्र को शून्य शांति पहुंचे।


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