Azam Khan : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान की कानूनी मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर जिला जेल से जमानत पर रिहा होते ही ED की लखनऊ जोनल टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
रविवार को ईडी अधिकारी आजम खान को PMLA की विशेष अदालत में पेश करने के लिए गाजियाबाद लेकर पहुंचे। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। एजेंसी का आरोप है कि सरकारी ठेकों के फंड में हेरफेर कर रकम ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी की संपत्तियों में लगाई गई थी।
जेल के बाहर ही ED ने लिया हिरासत में
यह पूरी कार्रवाई 31 अक्टूबर की शाम को हुई, जब आजम खान अपनी सजा पूरी करने के बाद रामपुर जेल से बाहर आ रहे थे। ईडी की टीम पहले से ही जेल परिसर के बाहर मौजूद थी और जैसे ही वे बाहर निकले, उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
इससे पहले 13 अक्टूबर को केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम ने रामपुर जेल की बैरक में जाकर आजम खान से घंटों पूछताछ की थी और उनका आधिकारिक बयान दर्ज किया था।
सरकारी फंड की हेरफेर का आरोप
ईडी की जांच में दावा किया गया है कि निजी ठेकेदारों और आजम खान के जौहर ट्रस्ट के बीच संदिग्ध वित्तीय लेनदेन हुए हैं। सरकारी ठेकों से लाभ कमाने वाले ठेकेदारों ने फंड को कथित तौर पर डायवर्ट करके जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट में दान और निर्माण कार्यों के रूप में इस्तेमाल किया।
इस कार्रवाई से ठीक कुछ दिन पहले, 28 अक्टूबर को ईडी ने जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को कुर्क कर लिया था। इस संपत्ति का बुक वैल्यू 426 करोड़ रुपये है, जबकि इसकी मौजूदा मार्केट वैल्यू करीब 1,170 करोड़ रुपये आंकी गई है।
अगस्त में कई ठिकानों पर पड़ी थी रेड
इस मामले की आंच काफी समय से आजम खान के करीबियों तक पहुंच रही थी। लगभग ढाई महीने पहले, 19 अगस्त को ईडी ने उत्तर प्रदेश के रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली स्थित 10 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े परिसर भी शामिल थे।
गौरतलब है कि रामपुर सदर से 10 बार विधायक और सपा के बड़े मुस्लिम चेहरे रहे आजम खान पिछले साल नवंबर से जेल में बंद थे। उन पर 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान अधिकारियों पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में 2 साल की सजा और जालसाजी का केस दर्ज है।


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