मुजफ्फरनगर में भाजपा को बड़ा झटका , छ: सीटों में से चार गंवाई

Summary :

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे चर्चित जिला मुजफ्फरनगर में भाजपा को फजीहत झेलनी पड़ी हैं। किसान आंदोलन के विरोद के बाद भी भाजपा ने मुजफ्फरनगर की सभी सीटों पर अपने पुराने विधायकों ने कमान सोंपी थी।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे चर्चित जिला मुजफ्फरनगर में भाजपा को फजीहत झेलनी पड़ी हैं। किसान आंदोलन के विरोद के  बाद भी भाजपा ने  मुजफ्फरनगर की सभी सीटों पर अपने पुराने विधायकों ने कमान सोंपी थी। लेकिन विरोध के चलते उसे चार सीटे गंवानी पड़ी हैं। किसान नेता राकेश टिकैत के अंदरूनी समर्थन से गठबंधन ने चार सीटों पर कामयाबी पाई हैं।
दो सीटे भाजपा की झोली में 
भाजपा ने दो सीटे पाने में कामयाबी हासिल की हैं। मुजफ्फरनगर सदर से राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल अपनी सांख बचाने में कामयाब हुए, तो वही खतौली विधानसभा सीट में विक्रम सैनी ने भारी मतों से गठबंधन प्रत्याशी को पटखनी दी हैं। मीरापुर में गठबंधन प्रत्याशी ने भाजपा के पैराशूट प्रत्याशी को पहले चरण से पीछे छोड़ दिया था। पुरकाजी व चरथावल विधानसभा में बहुत कम मतों से गठबंधन प्रत्याशी जीत हासिल की हैं। वहीं किसान नेता राकेश टिकैत के प्रभाव वाली बुढाना सीट पर गठबंधन प्रत्याशी राजपाल बालियान ने भाजपा विधायक उमेश मलिक से एक तरफा मुकाबले में जीत का परचम लहराया हैं।   
केंद्रिय मंत्री संजीव बालियान कि सियासी पिच के लिए शुभ संकेत नही 
इस हार को संजीव बालियान की साख से जोड़ देखा जा रहा हैं। भाजपा ने केंद्रिय मंत्री को पश्निमी उत्तर प्रदेश में बड़ी कमान सौंप रखी थी। लेकिन बालियान अपने सांसदी क्षेत्र में ही पिछडं गए। छ: में से चार सीटों पर गठबंधन प्रत्याशी का  जीतना  संजीव बालियान कि सियासी पिच के लिए शुभ संकेत नही हैं।  यही नही भाजपा को अपने संगठन क्षेत्र में  दुरूस्ता कायम रखनी होगी।  जिसके चलते ही केंद्रिय मंत्री संजीव बालियान राह मुश्किल में पड़ सकती हैं।

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