कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में इस वक्त लॉकडाउन लगा हुआ है। देश भर में लगे लॉकडाउन के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग लाखों प्रवासी मजदूर फंसे हुए हैं। केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के तीसरे चरण के दौरान कुछ ढील देते हुए प्रवासी मजदूरों को राहत देने के कदम में ऐसे प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य में भेजने का निर्देश दिया है।
इसी क्रम में सभी राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों को उनके पैतृक राज्यों में भेजने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और अब तक हजारों प्रवासी मजदूरों को विशेष ट्रेन, बसों और अन्य वाहनों के द्वारा उनके गृह राज्यों में भेजा जा चुका है।
इस कड़ी में आज उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लगभग बिहार के 1900 प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्यों में भेजा गया है और अभी 1500 लोगों को सोमवार को भेजने की तैयारियां की जा रही हैं।
जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि विशेष बसों पर सवार होने से पहले संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में सभी यात्रिेयों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। सभी स्वस्थ्य पाये गए। बिहार जाने वालों में श्रमिक, छात्र, पर्यटक समेत अन्य लोग शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि बिहार के 22 जिलों के 1900 लोगों को 60 बसों के माध्यम से भेजा गया है। सोशल डिस्टैन्सिंग के नियमों का पालन करते हुए प्रत्येक बस में सिर्फ 30 लोगों को बैठाया गया था। यात्रियों को समुचित खानपान की व्यवस्था के बाद उनके गणतव्य पर रवाना किया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि बिहार के शेष 1500 लोगों को यहां से सोमवार को बसों द्वारा पहुंचाया जाएगा। इसके लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही है।
श्री शर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे बिहार के कैमूर जिला में पहुंचने के बाद वहां की सरकार की ओर से लोगों को अपने संबंधित जिलों में भेजने की व्यवस्था की गई है। इस संबंध में अधिकारिक स्तर पर पहले ही बातचीत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि बिहार के जिन लोगों को बसों से भेजा गया है तथा सोमवार को भेजा जाना है, उनमें अधिकांश गुजरात के विभिन्न शहरों से वाराणसी रेलवे स्टेशन पर विशेष श्रमिक ट्रेनों से आये थे।


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