Lucknow News: केजीएमयू के दंत रोग विभाग की हालत खराब, सालों से बंद पड़ी हैं करोड़ों की मशीनें

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Lucknow News: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग में दंत चिकित्सा से जुड़ी जरूरी मशीनों के लंबे समय से खराब पड़े होने का मामला सामने आया है। विभाग की सिरैमिक लैब में कई महत्वपूर्ण मशीनें वर्षों से इस्तेमाल में नहीं हैं।

Lucknow News: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग में दंत चिकित्सा से जुड़ी जरूरी मशीनों के लंबे समय से खराब पड़े होने का मामला सामने आया है। विभाग की सिरैमिक लैब में कई महत्वपूर्ण मशीनें वर्षों से इस्तेमाल में नहीं हैं। इसका असर दंत चिकित्सा की पढ़ाई के साथ-साथ मरीजों के इलाज पर भी पड़ रहा है।प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग में क्राउन, ब्रिज, डेन्चर और सिरैमिक दांत तैयार करने के लिए सिरैमिक लैब का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन विभाग में लगी कई मशीनें लंबे समय से खराब बताई जा रही हैं।

जानकारी के मुताबिक, फिलहाल 3 सिरैमिक मशीन, 2 कास्टिंग मशीन, 2 सैंड ब्लास्टर, 1 अल्ट्रासोनिक मशीन और 9 लैब माइक्रोमोटर काम नहीं कर रहे हैं। इन उपकरणों के खराब होने के कारण लैब की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। बताया जा रहा है कि मशीनों की मरम्मत को लेकर अस्पताल प्रशासन को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

प्रैक्टिकल की पढ़ाई पर असर

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दंत चिकित्सा की पढ़ाई में केवल थ्योरी ही नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल प्रशिक्षण की भी बड़ी भूमिका होती है। छात्रों को क्राउन, ब्रिज, डेन्चर और अन्य दंत उपकरण तैयार करने का व्यावहारिक अनुभव इसी तरह की लैब में मिलता है।

मशीनों के खराब रहने से पोस्ट ग्रेजुएट और अंडर ग्रेजुएट छात्रों की प्रैक्टिस प्रभावित हो रही है। छात्रों के सामने यह चिंता भी है कि यदि उन्हें पर्याप्त व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं मिलेगा तो भविष्य में मरीजों का इलाज करते समय उन्हें परेशानी हो सकती है।

12 अनुभवी दंत मैकेनिक भी खाली

मामले का एक अहम पहलू यह है कि इन मशीनों के संचालन और तकनीकी काम के लिए विभाग में करीब 12 अनुभवी दंत मैकेनिक मौजूद हैं। मशीनें खराब होने के कारण इन कर्मचारियों की सेवाओं का भी पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

विभाग से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि पहले इन्हीं मशीनों की मदद से रोजाना बड़ी संख्या में दांत तैयार किए जाते थे। उनके मुताबिक, एक समय में करीब 150 से 200 दांत बनाए जाते थे, जिससे संस्थान को भी राजस्व मिलता था।

मरीजों को बाहर की लैब पर निर्भरता

केजीएमयू में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी शामिल होते हैं, जो कम खर्च में इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल आते हैं।

मशीनों के काम नहीं करने की स्थिति में कुछ काम के लिए बाहरी लैब या कंपनियों की मदद लेनी पड़ती है। इससे इलाज का खर्च बढ़ने की बात सामने आई है। विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि बाहरी व्यवस्था पर निर्भरता के कारण मरीजों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

कमीशन के आरोप, प्रशासन ने जांच की बात कही

सूत्रों ने इस पूरी व्यवस्था को लेकर कमीशन से जुड़े आरोप भी लगाए हैं। उनका दावा है कि बाहरी लैब संचालकों का विभाग में प्रभाव बढ़ा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन्हें फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। मामले पर केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने कहा कि प्रॉस्थोडॉन्टिक्स विभाग में खराब मशीनों का पूरा विवरण जुटाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि विभाग में जो भी कमियां सामने आएंगी, उन्हें जल्द दूर करने का प्रयास किया जाएगा। अस्पताल में मरीजों का हित सबसे ऊपर है। मशीनों की स्थिति और उनकी मरम्मत को लेकर प्रशासन की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विभाग की लैब कब पूरी तरह से दोबारा काम करना शुरू करती है।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।