Meerut News: मेरठ से 16 मई 2026 को शुरू हुई “रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो” पदयात्रा का समापन 20 मई को गाजियाबाद के अंबेडकर पार्क में हुआ। यह केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं रही, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जनता की भावनाओं और नाराजगी को सामने लाने वाला बड़ा अभियान बन गई। पांच दिनों तक चली इस यात्रा में हजारों युवाओं, किसानों, महिलाओं और कर्मचारियों की भागीदारी ने साफ कर दिया कि अब लोग सिर्फ वादों से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि अपने सवालों का जवाब चाहते हैं।
Meerut News: युवाओं के मुद्दे बने सबसे बड़ा केंद्र
इस पदयात्रा में सबसे ज्यादा चर्चा बेरोजगारी और पेपर लीक के मुद्दे की रही। बड़ी संख्या में युवा अपने हाथों में डिग्रियां लेकर यात्रा में शामिल हुए। उनका कहना था कि वर्षों की मेहनत के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है। कई भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक और भ्रष्टाचार की वजह से रद्द हो चुकी हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। युवाओं में सरकार के प्रति नाराजगी तो दिखाई दी, लेकिन साथ ही बदलाव की उम्मीद भी नजर आई। उनका मानना है कि अब ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि हर मुश्किल में उनके साथ खड़ा दिखाई दे। यही कारण रहा कि इस यात्रा में युवाओं की ऊर्जा और भागीदारी सबसे अधिक दिखाई दी।
किसानों और कर्मचारियों ने भी उठाई आवाज

यात्रा के दौरान किसानों ने अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखा। उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उन्हें उनकी फसलों का उचित दाम नहीं मिल रहा। इसके अलावा शिक्षामित्र, आशा बहनें और अन्य कर्मचारी भी अपनी मांगों को लेकर यात्रा में शामिल हुए। छोटे व्यापारियों और गरीब परिवारों ने भी महंगाई और आर्थिक परेशानियों का मुद्दा उठाया। लोगों का कहना था कि आम आदमी लगातार संघर्ष कर रहा है, लेकिन उसकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा। इस यात्रा ने अलग-अलग वर्गों को एक मंच पर लाकर उनकी आवाज को मजबूत करने का काम किया।
संजय सिंह जनता के बीच दिखाई दिए
इस पदयात्रा में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह लगातार जनता के बीच नजर आए। उन्होंने गांवों और कस्बों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि उनकी लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी। लोगों ने उनके इस अंदाज को पसंद किया क्योंकि वे मंचों और भाषणों तक सीमित नहीं रहे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इससे यह संदेश गया कि जनता अब ऐसे नेताओं को पसंद कर रही है जो सीधे लोगों के बीच जाकर संवाद करते हैं।
दिल्ली और पंजाब मॉडल की भी हुई चर्चा
यात्रा के दौरान कई जगहों पर दिल्ली और पंजाब में किए गए कार्यों की चर्चा भी सुनने को मिली। लोगों ने कहा कि अगर सरकारी स्कूलों में सुधार हो सकता है, अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिल सकता है और बिजली-पानी में राहत दी जा सकती है, तो उत्तर प्रदेश में भी ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती। जनता अब केवल बड़े नारों और भाषणों पर भरोसा नहीं कर रही, बल्कि जमीन पर किए गए कामों को देखकर तुलना कर रही है। यही वजह है कि इस पदयात्रा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नई राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।
2027 चुनाव को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
इस यात्रा के बाद यह साफ दिखाई देने लगा है कि 2027 का विधानसभा चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला नहीं रहेगा। बेरोजगारी, किसानों की समस्या, महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे चुनाव का मुख्य केंद्र बन सकते हैं। गाजियाबाद में यात्रा का समापन जरूर हुआ, लेकिन इससे उठी बदलाव की आवाज अब पूरे उत्तर प्रदेश में फैलती नजर आ रही है। जनता का संदेश साफ है कि अब वही राजनीति चलेगी जो लोगों की समस्याओं को समझेगी और उनके लिए जमीन पर काम करेगी।
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