कन्या पूजन के दौरान भूलकर भी न करें ये 6 गलतियां

1. कम कन्याओं को न बुलाएं
घर में भले ही खाना कम हो, लेकिन सच्चे मन से खिलाया गया एक छोटा सा टुकड़ा भी मां दुर्गा को प्रसन्न कर देता है। कन्या पूजन में कोशिश करें कि पूरे 9 कन्याओं को भोजन कराएं। इस बात का खास ख्याल रखें कि पूजन में कभी भी 7 से कम बच्चियां नहीं बैठनी चाहिए।
2. बालक को शामिल न करना
कन्या पूजन में केवल छोटी बच्चियों को ही नहीं, बल्कि बटुक भैरव के रूप में एक छोटे लड़के को भी जरूर शामिल करना चाहिए। माना जाता है कि बिना किसी बालक या बटुक को भोजन कराए कन्या पूजन अधूरा रहता है।
3. बच्चों को डांटें नहीं
कन्या पूजन में बहुत छोटी-छोटी बच्चियों को बुलाया जाता है। बच्चे बहुत नटखट होते हैं और नया घर या माहौल देखकर कई बार रोने भी लगते हैं। ऐसे में उन्हें डांटने की गलती बिल्कुल न करें। आप कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर भोजन करा रहे हैं, इसलिए उन्हें डांटने का मतलब सीधे मां दुर्गा को गुस्सा दिलाना है। बच्चियों के साथ हमेशा प्यार और शांत स्वभाव से पेश आएं।
4. किसी का अनादर न करें
इस बात का पूरा ध्यान रखें की घर आई कन्याओं का अपमान न हो। बच्चियों को कहां बैठना है, वे पूरा खाना खाएंगी या नहीं? इन सब बातों को लेकर उन पर कोई जोर-जबरदस्ती न करें। इसके साथ ही, किसी भी कन्या के साथ कोई भेदभाव न करें, सभी को बराबर प्यार दें।
5. भोजन को लेकर सावधानी बरतें
नवरात्रि के प्रसाद में पूरी तरह सात्विक खाना होना चाहिए, जिसमें प्याज या लहसुन का बिल्कुल इस्तेमाल न हो। इस बात का ध्यान रखें कि बच्चियों को परोसने से पहले माता रानी को भोग जरूर लगा दिया गया हो। इसके अलावा, ध्यान रखें कि घर में किसी ने भी उस खाने को पहले से झूठा न किया हो। कन्याओं की थाली में रखे खाने को उन्हें देने से पहले खुद चखना भी गलत माना जाता है।
6. कन्याओं को बिना दक्षिणा या उपहार के विदा करना
पूजा और भोजन के बाद जब कन्याएं जाने लगें, तो उन्हें कभी भी खाली हाथ न भेजें। अपनी श्रद्धा के अनुसार उन्हें लाल चुनरी, कोई उपहार (जैसे खिलौने या पढ़ाई की चीजें) और कुछ दक्षिणा (पैसे) देकर आदर और सम्मान के साथ विदा करें।


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