Rudraksha Pehenne ke Niyam: ब्रेसलेट की तरह पहन रहे हैं रुद्राक्ष? तो रुकिए! पहले जान लीजिए इसके ‘सीक्रेट रूल्स’, नहीं तो लग सकता है पाप

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Rudraksha Pehenne ke Niyam: हिंदू धर्म में रुद्राक्ष का बहुत बड़ा महत्व है। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए उनके भक्त रुद्राक्ष धारण करते हैं। कहा जाता हैं कि बेहद पवित्र माने जाने वाले रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। ‘रुद्राक्ष’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- ‘रुद्र’ (यानी शिव जी) और ‘अक्ष’ (यानी आंख)। इसका अर्थ है शिव की आंख या उनके आंसू। मान्यता है कि रुद्राक्ष पहनने से उससे जुड़े ग्रहों की अच्छी ऊर्जा मिलती है और ग्रहों के बुरे असर कम होते हैं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जो लोग रुद्राक्ष पहनते हैं, उन पर भगवान शिव का…

Rudraksha Pehenne ke Niyam: हिंदू धर्म में रुद्राक्ष का बहुत बड़ा महत्व है। भगवान शिव की कृपा पाने के लिए उनके भक्त रुद्राक्ष धारण करते हैं। कहा जाता हैं कि बेहद पवित्र माने जाने वाले रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। ‘रुद्राक्ष’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- ‘रुद्र’ (यानी शिव जी) और ‘अक्ष’ (यानी आंख)। इसका अर्थ है शिव की आंख या उनके आंसू।
मान्यता है कि रुद्राक्ष पहनने से उससे जुड़े ग्रहों की अच्छी ऊर्जा मिलती है और ग्रहों के बुरे असर कम होते हैं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जो लोग रुद्राक्ष पहनते हैं, उन पर भगवान शिव का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है।

रुद्राक्ष एक तरह के पौधे का बीज होता है, जिसे बहुत से लोग अलग-अलग तरीकों से गले या हाथ में धारण करते हैं। शास्त्रों में रुद्राक्ष को धारण करने के धार्मिक नियम बताए गए हैं, ताकि उसकी पवित्रता बनी रहे। अगर इसे नियमों के अनुसार न पहना जाए, तो इसका लाभ नहीं मिलता है। आइए जानतें हैं रुद्राक्ष की माला को सिद्ध करने की विधि और नियम क्या हैं?

Rudraksha Mala Niyam: रुद्राक्ष की माला को सिद्ध करने की विधि

Rudraksha Pehenne ke Niyam
Rudraksha Pehenne ke Niyam (AI Generated)
  • रुद्राक्ष की माला खरीदते समय ध्यान दें कि वह कहीं से टूटी-फूटी न हो और उसमें पूरे 108 दाने हों। अधूरी या खंडित माला शुभ नहीं मानी जाती।
  • किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के सोमवार को माला को पहले गंगाजल से धोएं, फिर गाय के दूध, दही, घी आदि का मिश्रण में डुबाएं।
  • इसके बाद माला को दोबारा गंगाजल या साफ पानी से धोकर एक साफ सफेद कपड़े से पोंछ लें।
  • अब एक बर्तन में पीला या लाल कपड़ा बिछाकर उस पर रुद्राक्ष की माला को रख दें।
  • भगवान शिव को याद करते हुए माला को शिवलिंग पर चढ़ाएं और धूप, दीपक, अक्षत और फूल से उसकी पूजा करें।
  • इसके बाद मन में ‘ॐ नमः शिवाय’ बोलते हुए माला के हर दाने को छुएं।
  • पूजा पूरी होने के बाद, इसे भगवान शिव का प्रसाद मानकर अपने गले में पहन लें।

Rudraksha Pehenne ke Niyam: रुद्राक्ष की माला पहनने के जरूरी नियम

Rudraksha Pehenne ke Niyam
Rudraksha Pehenne ke Niyam (AI Generated)
  • रुद्राक्ष की माला को हमेशा लाल या पीले रंग के धागे में पिरोकर ही पहनें।
  • माला या ब्रेसलेट बनाते समय भूलकर भी काले धागे का इस्तेमाल न करें।
  • अगर आप रुद्राक्ष पर सोने या चांदी का कवर लगवा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि रुद्राक्ष का हिस्सा आपकी त्वचा को छूता रहे।
  • अशुद्ध अवस्था में रुद्राक्ष पहनने की मनाही होती है। टॉयलेट जाते समय इसे उतारकर किसी पवित्र जगह पर रख दें।
  • अगर आप इससे मंत्र जाप करते हैं, तो माला को गोमुखी में रखें। जाप करते समय सीधे हाथ के अंगूठे और बीच की उंगली या तीसरी उंगली का ही इस्तेमाल करें।
  • पूजा के लिए कभी भी पहनी हुई माला का इस्तेमाल न करें। साथ ही, किसी दूसरे व्यक्ति की पहनी हुई माला को खुद कभी न पहनें।
  • रुद्राक्ष की माला को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें। जब भी इसे उतारें, किसी साफ और पवित्र स्थान पर ही रखें।

इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।